अमेरिका के 100 प्रतिशत टैरिफ युद्ध से परेशान होता देख भारत ने अपने तोपखाने के आधुनिकीकरण के लिए एक बार फिर अपने पुराने लेकिन भरोसेमंद मित्र-देश रशिया का रुख किया है.
थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के तीन दिवसीय मॉस्को दौरे (16-18 सितंबर) के दौरान, दोनों देशों की सेनाओं में सहयोग के साथ-साथ आर्टिलरी पर खास चर्चा हुई.
जनरल सेठ के मॉस्को दौरे के समापन पर थलसेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि इस यात्रा ने वरिष्ठ रूसी सैन्य नेतृत्व के साथ सार्थक बैठकों और प्रमुख सैन्य संस्थानों के दौरों के माध्यम से भारत-रूस रक्षा सहयोग को नई गति प्रदान की.
मॉस्को में, थलसेना प्रमुख ने रूसी संघ के उप रक्षा मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव के साथ बातचीत की. चर्चा में संयुक्त क्षमता विकास, पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान और सैन्य-से-सैन्य संबंधों के विस्तार के रास्तों पर बात हुई. इसके अलावा क्षमता विकास, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, तोपखाना आधुनिकीकरण और परिचालन अनुभव साझा करने पर केंद्रित बैठकें की.
थलसेना प्रमुख ने दागी रूस की पारंपरिक तोप
सेंट पीटर्सबर्ग की अपनी यात्रा के दौरान, जनरल धीरज सेठ ने मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का दौरा किया और वहां के फैकल्टी के साथ प्रशिक्षण पद्धतियों और तोपखाने के आधुनिकीकरण पर बातचीत की. थलसेना प्रमुख को ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल किले में पारंपरिक तोप दागने का अनूठा सम्मान भी दिया गया.
कई दशक से भारतीय सेना, रूस (और पूर्ववर्ती सोवियत संघ) की अलग-अलग तरह की तोप और रॉकेट सिस्टम इस्तेमाल करती है. इनमें 130एमएम और 122एमएम फील्ड गन के साथ बीएम-21 ग्रैड और बीएम-31 स्मर्च मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम शामिल हैं. लेकिन 80 के दशक के आखिरी वर्षों में भारतीय सेना ने बहुचर्चित स्वीडिश बोफोर्स तोप का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया.
बोफोर्स सौदे में हुई दलाली और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अगले तीन दशक तक भारतीय सेना ने एक भी आर्टलरी गन को अपने आयुध भंडार में शामिल नहीं किया. वर्ष 2018 में भारतीय सेना ने अमेरिका से 145 एम-777 लाइट हॉवित्जर गन्स खरीदी थी.
रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान जंग में आर्टिलरी ने फिर साबित किया अपना दमखम
हाल के वर्षों में भारत ने स्वदेशी धनुष (बोफोर्स का भारतीय वर्जन) और अटैग्स (एडवांस टोड आर्टिलरी गन) को जरूरी बनाकर तैयार कर लिया. रूस-यूक्रेन जंग और हालिया अमेरिका-ईरान जंग में आर्टलरी (तोप और रॉकेट) का जबरदस्त इस्तेमाल हुआ है. ऐसे में भारतीय सेना अपने तोपखाने को मजबूत बनाने में जुटी है.
टैरिफ-वॉर के चलते अमेरिका से हथियार खरीदना हो जाएगा भारी
अमेरिका ने रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगा दिया है. क्योंकि, रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में भारत का नंबर दूसरा है, ऐसे में अब अमेरिका से किसी भी तरह के हथियारों के खरीद-फरोख्त में भारत को खासी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.
रूस ने दिया है एंटी-एयरक्राफ्ट आर्टिलरी सिस्टम, पंतसिर देना का प्रस्ताव
रशिया भी भारत को अपने बेहद खास पंतसिर एंटी-एयरक्राफ्ट आर्टिलरी सिस्टम को देने का प्रस्ताव दे रहा है. ये दुनिया के उन चुनिंदा सैन्य प्रणालियों में शामिल है, जो जमीन से आसमान में मार करने वाली मिसाइल के साथ-साथ एंटी-एयरक्राफ्ट आर्टिलरी सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. पंतसिर को एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के साथ-साथ ड्रोन को मार गिराने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, जिस तरह पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ड्रोन अटैक किया था, उसके लिए भारतीय सेना को एंटी-ड्रोन प्रणाली की आवश्यकता है.
रूसी थल सेना मुख्यालय में, सेना प्रमुख ने समकालीन सैन्य घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और दोनों सेनाओं के बीच सहयोग को गहरा करने के उपायों पर चर्चा की, विशेष रूप से प्रशिक्षण, क्षमता विकास और पेशेवर अनुभव साझा करने के क्षेत्र में. सेना प्रमुख को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने मॉस्को में अननोन-सोल्जर्स की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की.
भारतीय सेना के मुताबिक, इस यात्रा ने भारत और रूस के बीच स्थाई विश्वास को और मजबूत किया और निरंतर सैन्य कूटनीति, संस्थागत आदान-प्रदान और पारस्परिक रूप से लाभकारी पेशेवर सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.
