By Nalini Tewari
मिडिल ईस्ट में मची उथल-पुथल के बीच इस्लामिक नाटो बनाने की कवायद तेज हो गई है. पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के मुताबिक इन तीनों देशों में किसी एक देश पर हमला तीनों देश पर हमला माना जाएगा.
अपने फेल्ड (फील्ड) मार्शल के साथ सऊदी के मक्का पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन और सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने संयुक्त रूप से इस समझौते की घोषणा की है. इस समझौते को मक्का रक्षा समझौते का नाम दिया गया है.
इससे पहले पिछले साल सऊदी अरब और पाकिस्तान ने रक्षा समझौता किया था, अब इसी समझौते में मुस्लिम देशों के खलीफा देश तुर्किए को भी शामिल कर लिया गया है.
हालांकि ये समझौता कितना हल्का है, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जब ईरान ने सऊदी अरब पर बार-बार हमला किया तो पाकिस्तान ने कुछ नहीं किया.
इस्लामिक नाटो की ओर बढ़ा पाकिस्तान, सऊदी-तुर्किए से समझौता
इजरायल ने जिस सुन्नी देशों के एक्सिस पर चिंता जताई थी, वो सच दिखने लगी है. सुन्नी देश मिलकर इस्लामिक नाटो बनाने की कवायद शुरु कर चुके हैं. पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए तीनों ने मक्का करार किया है. समझौते के बाद तीनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि इस्लामिक एकता बनाए रखने के लिए यह समझौता किया गया है. इसमें प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाला सशस्त्र हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. (https://www.instagram.com/reel/DbvimVOy20z/?igsh=Nzd4OWR2M2ozbnBn)
समझौते में यह भी कहा गया है कि भविष्य में अन्य देशों को भी इस गठबंधन में शामिल किया जा सकता है. तीनों देश रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को मजबूत करने के प्रावधानों पर काम करेंगे.
ये गठबंधन भविष्य में परेशानी का सबब इसलिए बन सकता है, क्योंकि तीनों देशों में पाकिस्तान के पास न्यूक्लिय ताकत है, तो तुर्किए के पास नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना.
सुन्नी देशों में क्यों खलबली, किसको किससे है खतरा
दुनिया में अलग-अलग मोर्चों पर सैन्य संघर्ष जारी है. जिसे लेकर दुनिया में दो फाड़ है. अमेरिका-ईरान के बीच फरवरी से भीषण युद्ध चल रहा है, तो लेबनान, फिलिस्तीन, इराक, जॉर्डन में इजरायल के साथ सैन्य खींचतान जारी है. इधर एशिया की बात की जाए तो पाकिस्तान और अफगानिस्ता के बीच तनाव है, हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की थी, तो तालिबान ने बदला लेने के लिए पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की. वहीं तुर्किए की इजरायल के साथ-साथ ग्रीस, साइप्रस से अदावत है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इजरायल और तुर्किए के बीच भी सैन्य संघर्ष संभव है.
पिछले महीने इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का विरोध किया था, जिसमें ट्रंप ने तुर्किए को लेटेस्ट स्टील्थ फाइटर जेट एफ 35 देने की बात कही थी.
ऐसे में सऊदी अरब हो या पाकिस्तान और तुर्किए आग के गोले पर बैठे हुए हैं. इसलिए पहले से दुश्मन देशों की घेराबंदी करने के लिए रक्षा समझौता करने पर मजबूर हैं.
भड़का ईरान, समझौते को बताया कागज़ी टुकड़ा
ईरान ने इस समझौते को कागज़ी बताया है और कहा है कि इस तरह का समझौता सऊदी अरब को सुरक्षा नहीं दे सकता.
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के सदस्य इब्राहिम रजाई ने करारा वार किया है. एक्स पर इब्राहिम रजाई ने लिखा, “जिस तरह सालों तक अमेरिकियों के एकतरफा फायदा उठाए जाने के बावजूद सऊदी अरब को सुरक्षा नहीं मिली, ये भी वैसा ही है. अपनी नीतियों को बदलो ताकि किसी दूसरे देश से सुरक्षा की भीख न मांगनी पड़े.”
आपको बता दें कि ईरान ने पिछले दिनों सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. ईरान ने ये अटैक सऊदी में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे पर किए थे. इसका बदला लेने के लिए सऊदी अरब ने यमन में ईरान के प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों पर एयरस्ट्राइक की. जिसके बाद ईरान-सऊदी के बीच भयंकर तनाव है.

