ऑपरेशन सिंदूर और ईरान-अमेरिका जंग से सीख लेते हुए इंडियन एयर फोर्स (आईएएफ) ने दुश्मन की ड्रोन-फौज से निपटने के लिए कमर कस ली है. इसके लिए भारतीय वायुसेना ने अपने अटैक हेलीकॉप्टर्स को ड्रोन-हंटर में तब्दील कर दिया है.
वायुसेना के ये वही अटैक हेलीकॉप्टर्स हैं, जिन्हें कभी एलओसी से लेकर एलएसी तक पहाड़ों की ऊंचाई पर बनी दुश्मन की चौकियों को तबाह करने के लिए ऑपरेट किया जाता था.
अटैक हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल आतंकियों के ठिकानों के लिए भी किया जा सकता है, जैसा यूएस फोर्सेज़ ने अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ किया था. लेकिन, भारतीय वायुसेना ने इन अटैक हेलीकॉप्टर को ड्रोन हंटर्स में कैसे तब्दील करने के लिए तैयार किया है.
अनगाईडेड रॉकेट को लैस किया लेज़र गाइडेड किट से
आपने देखा होगा कि अटैक हेलीकॉप्टर में अनगाइडेड रॉकेट लगे होते हैं, जो बेहद स्पीड से जमीन पर दनादन फायरिंग करते हैं. ऐसे में वायुसेना ने इन अटैक हेलीकॉप्टर्स के अनगाइडेड रॉकेट्स को एक खास लेजर गाइडेड किट से लैस कर दिया है. अब ये गाईडेड रॉकेट सिस्टम में तब्दील हो गए हैं.
इसके अलावा इन रॉकेट्स के वॉरहेड में भी तब्दीली की गई है. ये वॉरहेड खासतौर से ड्रोन्स को मार गिराने के लिए तैयार किए गए हैं.
इन रॉकेट्स की मारक क्षमता करीब 10 किलोमीटर है. ऐसे में दुश्मन के ड्रोन को 10 किलोमीटर दूर पर भी आसमान में मार गिराया जा सकता है.
मिडिल-ईस्ट जंग में अटैक हेलीकॉप्टर ने गिराया शहीद ड्रोन
हाल में अमेरिका-ईरान जंग में एक वीडियो ऐसा सामने आया था, जिसमें यूएई के एक अटैक हेलीकॉप्टर ने ईरान के शहीद ड्रोन को आसमान में मार गिराया था.
माना जा रहा है कि अमेरिका ने अपने अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर्स को भी इस काउंटर-ड्रोन तकनीक से लैस कर दिया है. ऐसे में भारतीय वायुसेना भी ड्रोन वॉरफेयर की लिए पूरी तरह तैयार हो रही है. यानी चुन चुन कर दुश्मन के ड्रोन को आसमान में मार गिरानी की तैयारी.
रैम्बो मूवी में दिखा था अटैक हेलीकॉप्टर के रॉकेट का कमाल
हॉलीवुड की ‘रैम्बो’ मूवी में दिखाया गया था कि कैसे हेलीकॉप्टर, जमीन पर फायरिंग करते हैं. लेकिन पिछले 30-40 वर्षों से इन अनगाइडेड रॉकेट्स का कोई खास इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था. क्योंकि मिलिट्री कमांडर्स और एक्सपर्ट्स को लगने लगा था कि मिसाइलों के आने से रॉकेट की योग्यता बेहद कम हो गई है. लेकिन ड्रोन वॉरफेयर ने दुनियाभर में युद्ध का स्वरूप बेहद तेजी से बदल दिया है.
रूस-यूक्रेन, ईरान और ऑपरेशन सिंदूर में दिखा ड्रोन वॉरफेयर
पिछले चार साल से चल रही रूस-यूक्रेन जंग में जिस तरह ड्रोन का जबरदस्त इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे ड्रोन की उपयोगिता तो बढ़ी है, लेकिन काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को ईजाद करने की भी खास जरूरत है.
मिडिल-ईस्ट जंग में ईरान ने शहीद ड्रोन का इस्तेमाल कर अमेरिका और इजरायल जैसे दो-दो मिलिट्री सुपरपावर के खिलाफ युद्ध का रुख पूरी तरह बदल दिया है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ लगातार तीन दिन तक ड्रोन अटैक किए थे. सियाचिन से लेकर जम्मू कश्मीर और पंजाब से लेकर राजस्थान और गुजरात तक पाकिस्तान ने ड्रोन अटैक किए थे.
ऑप सिंदूर में पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था रूसी विंटेज गन्स ने
ऑप सिंदूर के दौरान भारत ने रूस की विंटेज एंटी-एयरक्राफ्ट गन का पाकिस्तान के ड्रोन के खिलाफ जमकर इस्तेमाल किया था. इनमें भारतीय सेना यानी थलसेना की L-70 और Zu-23 का इस्तेमाल किया गया था. भारतीय वायुसेना को आकाश मिसाइल का इस्तेमाल करना पड़ा था. लेकिन एक 5-10 लाख के ड्रोन के लिए करोड़ों की मिसाइल का इस्तेमाल करना कहीं से भी फायदा का सौदा नहीं है. जिस तरह ड्रोन वॉरफेयर में स्वार्म-ड्रोन को शामिल किया गया है, जिसमें ड्रोन, झुंड के झुंड में आते हैं, उनके लिए मिसाइल भी कम पड़ सकती हैं.
वेस्ट एशिया की जंग में अमेरिका की पैट्रियाट और थाड मिसाइल सिस्टम के भी ईरान के आत्मघाती ड्रोन का मुकाबला करने में पसीने छूट रहे हैं.
पोखरण की ‘रोटर-क्लैप’ एक्सरसाइज क्यों है खास
हाल में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान से सटी सीमा के करीब जैसलमेर की पोखरण फायरिंग रेंज में एक बेहद खास एक्सरसाइज की. इस एक्सरसाइज का नाम था रोटर-क्लैप. रोटर इसलिए क्योंकि हेलीकॉप्टर के ऊपर लगी पंखों को रोटर कहा जाता है और हेलीकॉप्टर्स को भी वायुसेना में रोटर्स के नाम से जाना जाता है.
क्योंकि इस एक्सरसाइज में वायुसेना के सभी अटैक हेलीकॉप्टर्स ने मिलकर ड्रोन खतरों से लड़ने की अपनी तैयारियों को धार दी थी, इसलिए एक्सरसाइज का नाम रोटर-क्लैप रखा गया. हालांकि, कुछ साल पहले से इस तरह की हेलीकॉप्टर्स की एक्सरसाइज होती आ रही है, लेकिन वायुसेना ने पहली बार इस रोटर-क्लैप-3 एक्सरसाइज की जानकारी सार्वजनिक की है.
इस एक्सरसाइज का थीम था, काउंटर-यूएएस यानी अनमैनड एरियल सिस्टम को तबाह करना. इसमें सभी तरह के छोटे क्वाटकॉप्टर ड्रोन और शहीद जैसे आत्मघाती ड्रोन को काउंटर करने की ट्रेनिंग की गई.
अभी तक जितनी भी वायुसेना की एक्सरसाइज होती आई हैं, चाहे फिर वो तरंगशक्ति हो, वायुशक्ति हो, गगनशक्ति, उन सभी में फाइटर जेट… लड़ाकू विमान हिस्सा लेते हैं. लेकिन पहली बार ऐसा युद्धाभ्यास हुआ है, जिसमें सिर्फ हेलीकॉप्टर्स ने हिस्सा लिया.
कौन कौन से अटैक हेलीकॉप्टर ने हिस्सा लिया रोटर-क्लैप में
ये सभी वे अटैक हेलीकॉप्टर्स थे जिन्हें भारतीय वायुसेना ऑपरेट करती है. पहले नंबर पर आते हैं अमेरिका से लिए अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर. दूसरे नंबर पर हैं स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) ‘प्रचंड’. साथ में वेपन इंटीग्रेटेड–रूद्र हेलीकॉप्टर. पुराने पड़ चुके रशिया के ‘मी (एमआई)-25’ को भी एक्सरसाइज में शामिल किया गया. इसके अलावा, ‘मी (एमआई)-17 वी1’ को भी शामिल किया गया. हालांकि, ये हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर हैं जिन्हें ट्रांसपोर्ट के लिए इस्तेमाल किया जाता है. क्योंकि इनमें रॉकेट सिस्टम लगे हैं, इसलिए रोटर-क्लैप में इन हेलीकॉप्टर्स को भी शामिल किया गया.
खुद भारतीय वायुसेना ने इस एक्सरसाइज की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा की हैं.

