पाकिस्तान को चीन से मिलने वाले स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर भारत चिंतित जरूर है, बावजूद इसके भारतीय वायुसेना अपने दुश्मनों पर हावी हो सकती है. ये दम भरा है भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने.
94वें वायुसेना दिवस (8 अक्टूबर) से पहले राजधानी दिल्ली में सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तान के जंगी बेड़े में चीनी सैन्य साजो सामान थे, फिर भी पाकिस्तानी वायुसेना को जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा था.
चीनी वायुसेना के बेड़े में अब 02-02 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट हैं. एक जे-20 है जो चीन ने कुछ साल पहले तैयार किया था और अब अपग्रेड करने के बाद भारत से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब एयरबेस पर भारी संख्या में तैनात किए हैं. इसके अलावा 2024 में चीन ने दूसरा स्टील्थ फाइटर जेट जे-30 बनाकर तैयार किया है.
जे-30 फाइटर जेट को लेकर चीन और पाकिस्तान में एक गुपचुप सौदा हुआ है. सौदे के तहत अगले कुछ महीनों में पाकिस्तान को चीन से 40 जे-30 स्टील्थ लड़ाकू विमान मिलने जा रहे हैं. एयर चीफ मार्शल के मुताबिक, भारतीय वायुसेना इस बात से अवगत है कि पाकिस्तान को चीन से पांचवीं श्रेणी के लड़ाकू विमान मिलने जा रहे हैं.
ऑपरेशन सिंदूर में चीनी माल साबित हुआ था बेकार
वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, महज उन्नत तकनीक से कोई भी वायुसेना श्रेष्ठ नहीं बनती है. इस टेक्नोलॉजी को बाकी सैन्य साजो सामान से इंटीग्रेट करना आवश्यक है. एयर चीफ के मुताबिक, जब तक ये गैप नहीं भरा जाता, पाकिस्तान पर भारतीय वायुसेना की बढ़त बनी रहेगी.
एयर चीफ के मुताबिक, स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट एमका (एडवांस मीडिया कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) को बनने में अभी थोड़ा वक्त लग सकता है. ऐसे में भारतीय वायुसेना के लिए चीन और पाकिस्तान, दोनों के पास फिफ्थ जेनरेशन एयरक्राफ्ट, थोड़ा चिंता जरूर पैदा करता है. एयर चीफ ने साफ तौर से कहा कि भारत को किसी विदेशी स्टील्थ फाइटर जेट से लेने पर विचार करना चाहिए.
सु-57 लेने पर रक्षा मंत्रालय करेगा विचार: वायुसेना प्रमुख
इस सवाल पर कि रूस ने अपना स्टील्थ एयरक्राफ्ट सु-57 भारत को देने का भरोसा दिया है, वायुसेना प्रमुख ने कहा कि ये रक्षा मंत्रालय को देखना है कि कौन सा फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट बेहतर है. हाल में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साफ कर दिया था कि भारत अपने स्वदेशी एमका लड़ाकू विमान के बनने का इंतजार करेगा. राजेश कुमार सिंह ने रूस के सु-57 को लेकर साफ कर दिया था कि रूस से इस पर लेने पर कोई चर्चा नहीं चल रही है.
वायुसेना के कैसे आएंगे हैप्पी डेज
वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमानों की घटती स्क्वाड्रन भी पर चिंता जताई. एयर चीफ के मुताबिक, वायुसेना को निकट भविष्य में हर साल 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी. स्वदेशी सरकारी एविएशन कंपनी एचएएल (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ने हर साल 24 एलसीए तेजस फाइटर जेट सप्लाई करने का भरोसा दिया है. ठीक वैसे ही जल्द मीडियम रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) प्रोजेक्ट के तहत भी हर साल 10-12 नए (रफाल) लड़ाकू विमान वायुसेना को मिल सकते हैं.
हाल में रक्षा मंत्रालय ने रूस से 12 नए सुखोई (सु-30) लड़ाकू विमानों को खरीदने का सौदा भी किया है. ऐसे में दो-तीन साल तक ये सभी भी वायुसेना को मिल सकते हैं. एयर चीफ के मुताबिक, इस तरह वायुसेना के हैप्पी डेज शुरु हो जाएंगे.

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