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सेनाध्यक्ष का नेपाल दौरा, पूर्व फौजियों को करेंगे संबोधित

नेपाल में भारतीय सेना की अग्निवीर योजना के समर्थन में हो रहे प्रदर्शन के बीच, रविवार से थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का चार दिवसीय काठमांडू दौरा शुरु हो रहा है (16-19 अगस्त). सेनाध्यक्ष बनने के बाद, जनरल सेठ का ये पहला विदेश दौरा है. 

जनरल सेठ के नेपाल दौरे को लेकर भारतीय सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत व नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी संबंधों, सहयोग एवं समन्वय को सुदृढ़ करना है.

रविवार शाम, काठमांडू एयरपोर्ट पहुंचने पर जनरल सेठ की अगवानी नेपाली आर्मी के सह-प्रमुख (वाइस चीफ) ने की. नेपाली आर्मी ने थल सेनाध्यक्ष के नेपाल पहुंचने की तस्वीरें भी जारी की.

सोमवार को काठमांडू में थल सेनाध्यक्ष टुंडीखेल स्थित आर्मी पैविलियन में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद नेपाली सेना मुख्यालय में उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया जाएगा. वे नेपाली सेना के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के साथ बातचीत करेंगे और सैन्य संचालन महानिदेशक से आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे.

जनरल धीरज सेठ को मिलेगी नेपाली आर्मी के मानद जनरल की उपाधि

इसके बाद, जनरल धीरज सेठ राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होंगे. इस अवसर पर भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच चली आ रही विशेष परंपरा के तहत, नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल उन्हें नेपाली सेना के मानद ‘जनरल’ पद से सम्मानित करेंगे. उल्लेखनीय है कि भारत के थलसेनाध्यक्ष, नेपाली आर्मी के होनररी (मानद) सेना प्रमुख हैं. ठीक वैसे, नेपाली सेना के प्रमुख, इंडियन आर्मी के मानद जनरल हैं. 

थल सेना प्रमुख 18 अगस्त (मंगलवार) को शिवपुरी स्थित आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करेंगे. वे प्रशिक्षकों और विदेशी प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ भी संवाद करेंगे. इसके अलावा, वे आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर नेपाल के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों के साथ संवाद करेंगे.

जहां अग्निवीर योजना का हुआ समर्थन, उस पोखरा में पूर्व फौजियों को सेनाध्यक्ष करेंगे संबोधित

जनरल धीरज सेठ 19 अगस्त, 2026 को पोखरा में आयोजित पूर्व सैनिक रैली में शामिल होंगे. इस दौरान वे वीर नारियों और वीरता पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करेंगे और भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के साथ संवाद करेंगे. उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले, पोखरा में भारतीय सेना (की गोरखा रेजीमेंट) के पूर्व फौजियों ने अपनी सरकार के खिलाफ रैली निकालकर अग्निवीर योजना का समर्थन किया था. नेपाल के पूर्व-फौजियों ने भारतीय सेना की अग्निवीर योजना में नेपाली युवकों की भर्ती फिर से बहाल करने की गुहार लगाई है. क्योंकि वर्ष 2022 यानी जब से अग्निपथ (अग्निवीर) योजना लागू की गई है, तब से नेपाली युवाओं ने भारतीय सेना की भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है. 

नेपाल सरकार ने अग्निवीर योजना का किया है विरोध, भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती हैं बंद

अग्निपथ स्कीम लागू होने से पहले नेपाली युवकों को भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट में शामिल किया जाता था. लेकिन जब से अग्निपथ स्कीम लागू की गई है यानी 2022 तभी से नेपाली युवकों की गोरखा रेजिमेंट में भर्ती पूरी तरह बंद है. वर्ष 2022 में भारतीय सेना में युवाओं की भर्ती को पूरी तरह बदल दिया गया था. नई प्रक्रिया के तहत, अब भारतीय सेना में अग्निपथ योजना को लागू कर दिया गया है. ऐसे में सैनिकों को पहले चार (04) साल, सेना में अग्निवीर के तौर पर अपनी सेवाएं देनी होती है. चार साल की सेवाओं के बाद, अग्निवीरों की स्क्रूटनी की जाएगी और उनमें से महज 25 प्रतिशत ही सैनिक बनने के लिए चुने जाएंगे. इस वर्ष (2026) के अंत में अग्निवीरों का पहला बैच अपनी सेवाएं पूरी करने जा रहा है.

भारत और नेपाल में हैं रोटी और बेटी का संबंध 

भारतीय सेना के मुताबिक, भारत और नेपाल ऐसे दो पड़ोसी देश हैं, जिनके बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध हैं. दुनिया में इन अनूठे संबंधों की कोई दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है. ‘रोटी-बेटी का रिश्ता’, जनकपुर-अयोध्या और लुम्बिनी-बोधगया के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक जुड़ाव ने दोनों देशों के लोगों को गहरे रिश्तों में बांधा है. भारत एवं नेपाल की साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी विश्वास और क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा समृद्धि सुनिश्चित करने के साझा हितों पर आधारित है.

थल सेनाध्यक्ष की यह यात्रा भारत व नेपाल के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सैन्य संबंधों को और विस्तार देगी. इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी सहयोग को सुदृढ़ करने और सहयोग के नए अवसर तलाशने का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होगा.

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