Acquisitions Breaking News Geopolitics TFA Exclusive Weapons

इंग्लैंड या फ्रांस, AMCA इंजन की रेस दिलचस्प

भारत के स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट एमका के लिए भिड़ गए हैं यूरोप के दो बड़े देश, इंग्लैंड और फ्रांस. लेकिन इन दोनों देशों का, फाइनल में हो सकता है अमेरिका से मुकाबला. ऐसे में पांचवें श्रेणी के लड़ाकू विमान के इंजन की रेस तो दिलचस्प हो गई है.

स्वदेशी एमका इंजन बनने में हालांकि, एक लंबा वक्त लग सकता है. ऐसे में बड़ा सवाल कि भारत के पास क्या हो सकते हैं विकल्प. 

दुनिया में बेहद कम देश हैं जो लड़ाकू विमानों के एविएशन इंजन बना सकते हैं. उसमें भी स्टील्थ फाइटर जेट यानी फिफ्थ जेनरेशन एयरक्राफ्ट का इंजन और भी मुश्किल है. ऐसे में भारतीय वायुसेना के लिए जो स्टील्थ फाइटर जेट बनाया जाना है यानी एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमका), उसके लिए एविएशन इंजन बनाना भी एक बड़ी चुनौती है.

इंग्लैंड की रोल्स रॉयस और रिलायंस का इंजन होगा 2034 में तैयार

कुछ दिन पहले, देश के सबसे बड़े बिजनेस हाउस, रिलायंस ने इंग्लैंड (यूके) की रोल्स रॉयस कंपनी से हाथ मिलाया है. यहां पर गौर करने वाली बात है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी पहली बार डिफेंस सेक्टर में हाथ आजमाने जा रही है.

रोल्स रॉयस और रिलायंस की इस डील पर इंग्लैंड के उच्च अधिकारियों का दावा है कि वर्ष 2034 तक एमका का इंजन बनकर तैयार हो जाएगा. 

इंग्लैंड ने दिया 100% टीओटी का वादा

इंग्लैंड की रोल्स रॉयस कंपनी, अमेरिका के एफ-35 फाइटर जेट के इंजन बनाने में जीई कंपनी की मदद करती है. रोल्स रॉयल ने रिलायंस कंपनी को पूरी तरह से एविएशन इंजन बनाने की टेक्नोलॉजी यानी 100% ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) का वादा किया है. ये 120 किलो न्यूटन (केएन) की पावर का इंजन होगा, जो किसी भी स्टील्थ फाइटर जेट के लिए जरूरी होता है. 

ब्रिटिश अधिकारियों के मुताबिक, इंजन बनने के बाद बहुत हद तक संभव है कि भारत और इंग्लैंड की सरकारें एक साझा एग्रीमेंट कर लें, यानी इंटर-गवर्मेंटल एग्रीमेंट (आईजीए). इसी महीने भारत और यूके ने डिफेंस  पार्टनरशिप की 25वीं मीटिंग की थी. इस मीटिंग में दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर खासा जोर दिया है. 

फ्रांस की साफरान मिलाएगी डीआरडीओ से हाथ

यूरोप का एक दूसरा देश है फ्रांस, जिसने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर एमका के लिए एविएशन इंजन बनाने की पेशकश की है.
फ्रांस ने एमका इंजन की डेटलाइन अभी जारी नहीं की है. लेकिन माना जा रहा है कि 2037 तक डीआरडीओ की जीटीआरई (गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट) लैब और साफरान का इंजन बनकर तैयार होगा.

फ्रांस की साफरान के पास अभी फिलहाल ऐसा कोई अनुभव नहीं दिखाई पड़ रहा है. आपको यहां पर ये भी बता दें कि अभी तक साफरान और डीआरडीओ की जीटीआरई लैब में एग्रीमेंट हुआ नहीं है लेकिन फ्रांस ने रेस में हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है. जल्द इस डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की तरफ से फाइटर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) में पहुंचने की उम्मीद है

चीन-पाकिस्तान के स्टील्थ फाइटर जेट से दोहरी चुनौती

अब अगर 2034 या फिर 2037 तक एविएशन इंजन बनेगा, तब साफ समझा जा सकता है कि भारत का स्टील्थ फाइटर जेट कब तक वायु सेना को मिलेगा. ये तब है जब चीन के पास इस वक्त 02-02 स्टील्थ फाइटर जेट हैं और पाकिस्तान को भी जल्द दो फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट मिलने जा रहे हैं. 

रूस और अमेरिका का ऑफर, क्या करेगा भारत

यही वजह है कि रूस और अमेरिका जैसे देशों ने भारत को सीधे अपने-अपने स्टील्थ फाइटर जेट देने की पेशकश की है. अमेरिका ने अपना एफ-35 देने का ऑफर किया है और रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने तो अपने सु-57 लड़ाकू विमान को मेक इन इंडिया के तहत बनाने की पेशकश की है. इसके अलावा, डीआरडीओ का जो कावेरी इंजन है, तो पिछले तीन दशक से बन रहा है, उसे भी भारत ने रूस भेजा है ताकि उससे एक फाइटर जेट इंजन तैयार किया जा सके. उस कावेरी इंजन पर किसी और दिन बात करेंगे. 

एमका इंजन पर अमेरिका पर भरोसा कम

स्वदेशी एमका इंजन की रेस मे एक तीसरा और बड़ा खिलाड़ी भी है, लेकिन वो चुपचाप बैठा हुआ है. वो है अमेरिका. करीब तीन साल पहले यानी 2023 में अमेरिकी की जीई-एयरोस्पेस कंपनी से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने एफ-414 इंजन के लिए एग्रीमेंट किया था. लेकिन तीन साल हो गए हैं, ये डील आगे नहीं बढ़ी है. इसका एक बड़ा कारण ये है कि जीई कंपनी ने अभी तक एफ-404 इंजन की सप्लाई में बहुत देर कर दी है. 

जीई कंपनी को एलसीए-तेजस के उन्नत वर्जन एलसीए-मार्क 1ए के लिए 99 एफ-404 इंजन देने थे. लेकिन पिछले दो सालों में महज 07 इंजन मिल पाए हैं. ऐसे में इस बात की संभावना कम लगती है कि अमेरिका अपना वादा पूरा कर पाएगा.

अमेरिका को पहले 404 इंजन की सप्लाई सुधारनी होगी, तभी भारत 414 के लिए आगे बढ़ सकता है. ये 414 इंजन भी भारत, एलसीए तेजस के मार्क-2 वर्जन और एमका के प्रोटो वर्जन या फिर शुरुआती खेप के लिए खरीदना चाहता था. यही वजह है कि भारत ने इंग्लैंड और फ्रांस की तरफ रुख किया है. 

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *