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पेंटागन को अलीबाबा और 180 लगे चोर, चीनी कंपनियों को नहीं देगा ठेका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ चाहे कितनी मीठी-मीठी बातें और सहयोग बढ़ाने की बात कही हो, लेकिन सच्चाई ये है कि दोनों देशों के बीच अब टेक और कॉमर्स कंपनियों की लड़ाई भी शुरु हो चुकी है.

अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने चीन की टेक कंपनी अलीबाबा, इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली बीवाईडी और इंटरनेट सर्च इंजन कंपनी बायडू और यूनिट्री जैसी बड़ी कंपनियों को चीन की सेना से जुड़ा बता डाला है और इन सभी कंपनियों को अपनी सैन्य कंपनियों की सूची में डाल दिया है.

पेंटागन के इस एक्शन से होगा ये कि ये कंपनियां अमेरिकी रक्षा ठेके नहीं ले सकेंगी. अमेरिका का आरोप है कि चीन निजी कंपनियों के जरिए सैन्य ताकत बढ़ा रहा है.

चीन की बड़ी कंपनियों पर पेंटागन का चाबुक

अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने चीन की कई बड़ी कंपनियों को ऐसी सूची में डाल दिया है, जिसके बाद इन कंपनियों को अमेरिकी रक्षा कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल पाएंगे. चीन की सेना की मदद करने के आरोप में पेंटागन ने बड़ी टेक कंपनी अलीबाबा, इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली बीवाईडी और सर्च इंजन कंपनी बायडू जैसी बड़ी कंपनियों पर चाबुक चलाया है. पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य ताकत बढ़ाने में मदद कर रही हैं। इसी कारण अब इन कंपनियों को अमेरिकी रक्षा ठेकों से बाहर कर दिया गया है.

पेंटागन की नई लिस्ट के मुताबिक चीन की 188 कंपनियों को सैन्य कंपनी की सूची में डाला गया है, जबकि इससे पहले पिछले साल तकरीबन 130 कंपनियों कै नाम शामिल थे.

पेंटागन ने ई कॉमर्स कंपनियों को बताया चीनी सेना का चेहरा

पेंटागन ने अपनी सूची में उन कंपनियों को भी जोड़ा गया है, जिन्हें अब तक आम कारोबारी कंपनियां माना जाता था. जैसे की अलीबाबा दुनिया की बड़ी ई-कॉमर्स और क्लाउड कंपनी है, लेकिन पेंटागन का कहना है कि ये चीन की सेना का ही चेहरा है और चीनी सेना की ताकत बढ़ा रही है.

वहीं, बीवाईडी इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की बड़ी कंपनी है, बायडू चीन का प्रमुख सर्च इंजन (इंटरनेट सर्च इंजन) है, इनके अलावा रोबोट बनाने वाली यूनिट्री कंपनी को भी सूची में डाला गया है.

पेंटागन के मुताबिक चीन ऐसी कंपनियों से आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता हासिल करता है, जो बाहर से आम कारोबारी संस्थान दिखते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीक  के कारण ये कंपनियां चीनी सेना को मदद करती है.

इसी आशंका के चलते अमेरिका ने अब केवल हथियार बनाने वाली कंपनियों ही नहीं, बल्कि टेक और ऑटो कंपनियों पर भी एक्शन लिया है.

पेंटागन की सूची में आने के बाद ये कंपनियां सीधे अमेरिकी रक्षा विभाग के ठेके नहीं ले सकेंगी, हालांकि वे अभी भी अमेरिका में कारोबार कर सकती हैं.

हमारी कंपनियों से भेदभाव कर रहा अमेरिका: चीनी दूतावास

चीन के दूतावास ने अमेरिका के फैसले की आलोचना की है. चीन ने कहा कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भेदभावपूर्ण सूची बना रहा है और चीनी कंपनियों को निशाना बना रहा है.

चीनी दूतावास का कहना है कि “चीनी कंपनियां जिन देशों में काम करती हैं, वहां के कानूनों का पालन करती हैं. अमेरिका को निष्पक्ष और गैर-भेदभाव वाला कारोबारी माहौल देना चाहिए.”

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