ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर हुए हमले और भारत के परमाणु हथियारों को लेकर ग्लोबल थिंक टैंक सिपरी के बड़े खुलासे से पूरी दुनिया हैरान रह गई है. ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद खुलासा हुआ है कि भारत ने पाकिस्तान के जिन मिसाइल और एयरबेस पर अटैक किए थे, वे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े थे.
वहीं सिपरी ने भारत की ताकत के बारे में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत ने पहली बार अपने परमाणु हथियारों को ऑपरेशनली तैनात कर दिया है.
भारत के टारगेट पर थे पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने: सिपरी
दुनियाभर के परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाले ग्लोबल थिंक टैंक सिपरी (एसआईपीआरआई) यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपने ताजा रिपोर्ट यानी सिपरी-2026 जारी की है. इस रिपोर्ट में दो बड़े खुलासे हुए हैं. पहला है ऑपरेशन सिंदूर को लेकर, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी.
सिपरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के जिन एयरबेस और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया था, वो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े थे.
दरअसल 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम नरसंहार का बदला लेने के लिए भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. 7 से 10 मई 2025 के बीच, भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों ठिकानों के साथ-साथ पाकिस्तान के 11 मिलिट्री ठिकाने और एयरबेस पर भी ब्रह्मोस मिसाइल से हमला किया गया था. इन हमलों से घबराए पाकिस्तान ने पहले अमेरिका के सामने और फिर भारत से युद्ध रोकने की मिन्नत की थी. तब जाकर भारत ने हमले रोके थे.
किराना हिल्स-नूरखान बेस पर भारत की अटैक से घबराया पाकिस्तान: सिपरी
ऑपरेशन सिंदूर में हमले के दौरान कुछ ऐसे वीडियो सामने आए थे, जिनमें पाकिस्तान के किराना हिल्स पर मिसाइल अटैक दिखाई दिया था. किराना हिल्स में माना जाता है कि पाकिस्तान का सीक्रेट न्यूक्लियर बेस है. बाद में ये बात सामने आई थी कि भारत ने किराना हिल्स में पाकिस्तान के न्यूक्लियर बेस के मुहाने पर हमला किया था यानी बेहद ‘कैलकुलेटेड’ हमला. ऐसा हमला कि न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा भी ना रहे और पाकिस्तान किसी भी तरह से अपनी परमाणु हथियारों को इस बेस से बाहर भी ना निकाल पाए.
भारतीय वायुसेना की सुखोई फाइटर जेट ने रावलपिंडी में पाकिस्तानी वायुसेना के नूर खान बेस पर भी अटैक किया था. हालांकि, जैसा कि कोई देश अपने न्यूक्लियर बेस के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है, पाकिस्तान ने भी नहीं की थी, लेकिन ये माना जाता है कि नूरखान बेस पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर है. ऐसे में इसे तबाह कर भारत ने पाकिस्तान के हाथ-पैर काट दिए थे. यही वजह है कि पाकिस्तान और अमेरिका, हमले रोकने के लिए भारत के सामने गिड़गिड़ाए थे.
खास बात है कि ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर से कहा था कि हमलों के दौरान पाकिस्तान के परमाणु ब्लफ यानी ब्लैकमैलिंग को भारत की सेनाओं के तबाह कर दिया था. उस वक्त, कम ही लोग पीएम मोदी के इस बयान को ठीक से समझ पाए थे. लेकिन सिपरी की ताजा रिपोर्ट से साफ हो गया है कि पीएम मोदी ने ये बयान क्यों दिया था.
भारत के पास 190 न्यूक्लियर हथियार: सिपरी
सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल 190 परमाणु हथियार हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं. रिपोर्ट में हालांकि, ये भी कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारत और पाकिस्तान ने परमाणु तनाव को बढ़ाया नहीं था.
सिपरी की रिपोर्ट में दूसरा जो बड़ा खुलासा हुआ है, वो ये कि भारत ने अपने 12 परमाणु हथियारों को ऑपरेशनली तैनात कर दिया है. अभी तक भारत के परमाणु हथियार स्टोरेज यानी में रहते थे और लॉन्चर अलग होते थे. लेकिन इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारत के पास जो कुल 190 न्यूक्लियर वेपन हैं, उनमें से 12 लॉन्चर के साथ तैनात हैं.
भारत के परमाणु हथियार ऑपरेशनली तैयार: सिपरी
अभी तक चीन, अमेरिका और रूस जैसे देशों के परमाणु हथियार ऑपरेशनली तैनात रहते थे. लेकिन सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के न्यूक्लियर हथियार भी ऑपरेशनली तैयार हैं.
भारत की तीन (03) परमाणु पनडुब्बियां, आईएनएस अरिहंत, अरिघात और अरिमदन बनकर तैयार हो चुकी हैं और हिंद महासागर में तैनात रहती हैं. ये तीनों एसएसबीएन पनडुब्बियां हैं, जो परमाणु हथियारों से लैस रहती हैं.
सिपरी की पिछली रिपोर्ट में चीन के बारे में भी ऐसा खुलासा किया गया था यानी चीन ने अपने परमाणु हथियारों को ऑपरेशनली तैनात किया है. संभवत भारत ने भी इसीलिए ये कदम उठाया है. हालांकि, जैसा हमने बताया कि कोई भी देश अपने परमाणु हथियारों के बारे में कोई जानकारी कम ही सार्वजनिक करते हैं. लेकिन ये बताना जरूरी है कि भारत में एक स्ट्रेटेजिक फोर्स कमांड है, जो सेना के तीनों अंग यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना के न्यूक्लियर वेपन को संभालने की जिम्मेदारी संभालती है. ये फोर्स यानी एसएफसी, सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय–पीएमओ–के अधीन है.
परमाणु हथियारों को लेकर भारत की नो फर्स्ट यूज की पॉलिसी है यानी युद्ध के दौरान भारत, अपने परमाणु हथियारों को कभी भी पहले इस्तेमाल नहीं करेगा. लेकिन पिछले कुछ सालों से इस पॉलिसी को बदलने की मांग भारत के स्ट्रेटेजिक-सर्कल में उठाई जा रही है.

