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व्यापारिक जहाजों पर हमले अस्वीकार्य, जयशंकर AZEC Plus में बोले

होर्मुज में अमेरिका-ईरान की नाकेबंदी के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा को लेकर दुनिया में फैली अस्थिरता पर चिंता जताई है. जापान की मेजबानी में हुए एज़ीईसी प्लस (एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी) की बैठक में जयशंकर ने होर्मुज में जहाजों पर हमले का मुद्दा उठाते हुए व्यापारिक जहाजों पर हमले को अस्वीकार्य बताया है.

जयशंकर ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा, कि नई दिल्ली समुद्री व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध रास्तों का समर्थन करता है.

इस वर्जुअल समिट में कई बड़े एशियाई राष्ट्राध्यक्षों और बड़े नेताओं ने सेंट्रल एशिया में सैन्य संघर्ष पर चिंता जताई. बैठक में मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर और थाईलैंड के पीएम अनुतिन चरनविराकुल के नाम प्रमुख हैं। वहीं, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भी अपनी बात रखी.

इस समिट का आयोजन ऐसे वक्त में किया गया, जब अमेरिका ने होर्मुज की नाकेबंदी की हुई है, तो वहीं ईरान और चीन समेत यूरोप ने इस नाकेबंदी का विरोध किया है.

व्यापारिक जहाजों पर हमले बर्दाश्त नहीं: जयशंकर

बैठकके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने लिखा, “जापान की ओर से आयोजित एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी की बैठक में हिस्सा लिया. मैंने स्पष्ट किया है कि व्यापारिक जहाजों पर हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं. किसी भी हाल में समुद्र में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं है.  दुनिया की आर्थिक तरक्की के लिए जरूरी है कि ऊर्जा बाजारों पर किसी भी तरह का दबाव न बनाया जाए. भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है. भारत आपूर्ति श्रृखंला को मजबूत बनाने के लिए अपने जैसे विचार रखने वाले देशों के साथ मिलकर काम करेगा.”

अपने पार्टनर देशों से लगातार संपर्क में हैं जयशंकर

पूरी दुनिया इस वक्त उथल पुथल से जूझ रही है. ऐसे में विदेश मंत्री एस जयशंकर पश्चिम एशिया की स्थिति पर कई देशों के विदेश मंत्रियों से बात कर चुके हैं. इसी सप्ताह जयशंकर ने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग और इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से भी फोन पर बात की. दोनों के बीच पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज स्‍ट्रेट पर चर्चा हुई थी. जिसके बाद एस जयशंकर ने बताया कि गिदोन सार से उनकी हमेशा की तरह अच्छी बातचीत हुई. ईरान, होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान पर मंथन किया गया.

जयशंकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ भी संपर्क में हैं. 28 फरवरी यानि ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमले से लेकर अब तक कई राउंड की बातचीत हो चुकी है.

होर्मुज पर क्या सोचता है मलेशिया, फिलीपींस

मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने इस सम्मेलन में अपना रुख साफ किया. कहा कि मलेशिया ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. एक प्रमुख एलएनजी उत्पादक होने के नाते, मलेशिया क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा.

फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर ने कहा कि “होर्मुज के बंद होने के बाद उनके देश में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है. फिलीपींस जैसे द्विपीय देशों के लिए यह स्थिति और भी भयानक हो जाती है क्योंकि वे पूरी तरह से आयातित तेल पर निर्भर हैं.”

आपको बता दें कि इस सम्मेलन में दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, सिंगापुर और श्रीलंका के मंत्रियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया.

ईरान युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में विभिन्न देशों के जहाजों का आवागमन बाधित होने से दुनिया के तमाम देशों में ऊर्जा आपूर्ति थम गई है. यूरोप से लेकर एशिया तक के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मचा हुआ है.

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