होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी को चीन ने तो आंख दिखा ही दी है, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगातार उनके यूरोपीय साथियों ने भी फटकार मिल रही है. यूरोपीय देश अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक योजना तैयार कर रहे हैं.
फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी समेत यूरोप होर्मुज की खाड़ी में बिना अमेरिकी दखलंदाजी के शिपिंग को सुरक्षित बनाने के एक मास्टरप्लान पर काम कर रहे हैं. इसके तहत लड़ाई समाप्त होने के बाद समुद्री मार्गों पर भरोसा बहाल करने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया जाएगा.
ये गठबंधन फ्रेंच प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की अगुवाई में बनाया जाएगा. नए गठबंधन की चर्चा ऐसे वक्त में जोरों पर है जब फ्रांस-ब्रिटेन की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ये क्लियर कर दिया गया कि वो ट्रंप के नाकाबंदी वाले प्लान का हिस्सा नहीं होंगे.
होर्मुज पर यूरोप का मास्टर-प्लान, फ्रांस-ब्रिटेन की अगुवाई में नया गठबंधन
ईरान से बात न बनने के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से यूरोप के साथी भी मुंह मोड़ चुके हैं. ब्रिटेन और फ्रांस ने जो कदम उठाया है, उससे ट्रंप को मिर्ची लगनी तय है. क्योंकि ब्रिटेन-फ्रांस ने न सिर्फ होर्मुज नाकेबंदी से अपना हाथ खींच लिया बल्कि युद्ध खत्म होने के बाद समंदर में एक नया गठबंधन बनाने का ऐलान कर दिया है, जिसमें न तो अमेरिका, न ही इजरायल-ईरान को शामिल किया जाएगा.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि फ्रांस और ब्रिटेन इस सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी की सुरक्षा के लिए एक “समन्वित, स्वतंत्र, बहुराष्ट्रीय योजना” पर चर्चा करने के लिए संयुक्त रूप से एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे.
स्टार्मर ने बताया कि, “ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों को आमंत्रित किया है जो नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के हमारे लक्ष्य को साझा करते हैं” और शिखर सम्मेलन में “संघर्ष समाप्त होने के बाद” जहाजरानी की सुरक्षा के तरीकों पर चर्चा की जाएगी.”
वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने लिखा, “आने वाले दिनों में, यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर, हम उन देशों के साथ एक सम्मेलन आयोजित करेंगे जो जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण बहुराष्ट्रीय मिशन में हमारे साथ योगदान देने के लिए तैयार हैं.” यह मिशन पूरी तरह से रक्षात्मक होगा और परिस्थितियां अनुकूल होते ही तैनात होने के लिए तैयार होगा.”
अमेरिकी दखल के बिना यूरोपीय नाटो बनाने की तैयारी
यूरोपीय देश यह योजना होर्मुज स्ट्रेट से बिना अमेरिका के सीधे दखल के शिपिंग को सुरक्षित करने के लिए बना रहे हैं. ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान ट्रांस-अटलांटिक संबंधों को नया रूप दिया है.
आपको बता दें, ट्रांस-अटलांटिक अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच एक रणनीतिक, सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से विश्व व्यवस्था की आधारशिला माना जाता रहा है.
लेकिन दुनिया में लगातार बढ़ते सैन्य संघर्ष और बदले वर्ल्ड ऑर्डर के बाद ब्रिटेन और फ्रांस की अगुवाई में एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत लड़ाई समाप्त होने के बाद समुद्री मार्गों पर भरोसा बहाल करने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया जाएगा.
इस पहल में समुद्र में बिछी माइंस को हटाने के अभियान (माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन) और नौसेना की तैनाती जैसे कदम शामिल होंगे. और अमेरिका, इजरायल और ईरान जैसे सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल देशों को इस गठबंधन से बाहर रखा जाएगा.
आत्मनिर्भर बन रहा यूरोप, नाटो से अलग हो सकता अमेरिका
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो देशों पर वार कर ही रहे थे लेकिन हालिया सैन्य संघर्ष में यूरोपीय देशों से अमेरिका की दूरियां और बढ़ गई हैं. ईरान युद्ध के दौरान ब्रिटेन, फ्रांस, इटली जैसे देशों ने अमेरिकी सेना को एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं करने दिया. तो कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के होर्मुज ब्लॉकेड जैसी रणनीति को भी गलत बता दिया.
इसी कारण से ट्रंप लगातार नाटो देशों पर आग उगल रहे हैं. नाटो को कागजी शेर बता रहे हैं तो नाटो से अलग होने की धमकी भी दे चुके हैं. ट्रंप यहां तक कह चुके हैं कि अगर अमेरिका, नाटो गठबंधन में न रहे तो यूरोप अपने पैरों पर नहीं खड़ा हो सकता है.
ट्रंप की फैसलों की अस्थिरता के चलते यूरोप को भी लगने लगा है कि ये सही वक्त है जब अमेरिका के बिना यूरोप को आत्मनिर्भर बनना चाहिए. इस नए गठबंधन का मायने ये है कि एक अलग सेना बनाई जा सकती है, जो होर्मुज में जहाजों को एस्कॉर्ट करके सुरक्षित निकाले. लेकिन सवाल ये भी है कि अमेरिका खुद को स्वंभू बॉस समझता है जो इसका विरोध करेगा, तो वहीं ईरान भी नहीं चाहेगा की यूरोपीय देशों के सैनिक होर्मुज में डेरा डालें.

