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गोला-बारूद के टेंडर के बदले घूस, SMPP और MIL पर सीबीआई का शिकंजा

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भारतीय सेना के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट और लोएटरिंग म्युनिशन (कामकाजी ड्रोन) सप्लाई करने वाली दिल्ली की कंपनी के मालिक को डिफेंस पीएसयू के डायरेक्टर को घूस देने के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया है. रक्षा मंत्रालय के अधीन म्युनिशन इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) के एग्ज्यूकेटिव डायरेक्टर और उसके भाई को भी सीबीआई ने धर-दबोचा है.

दिल्ली के कंपनी की पहचान एसएमपीपी के तौर पर हुई है, जिसने भारतीय सैनिकों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट सप्लाई किए हैं. इसके अलावा कंपनी, गोला-बारूद और मिलिट्री व्हीकल्स को बुलेटप्रूफ बनाने के बिजनेस में शामिल है.

सीबीआई ने एमआईएल के एग्ज्यूकेटिव डायरेक्टर अनिल कुमार की गिरफ्तारी के मामले में आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि आरोपी ने प्राइवेट वेंडर्स और कॉन्ट्रेक्टर्स को ‘ऑफिसियल-फेवर’ के बदले में घूस की मांग की थी. ऐसे में अनिल कुमार सहित दो प्राइवेट लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

घूस लेते धरा गया म्युनिशन इंडिया का डायरेक्टर

सीबीआई के मुताबिक, आरोपी अनिल कुमार के पुणे स्थित सरकारी आवास से 1.73 करोड़ की नकदी जब्त की गई है. इसके अलावा अनिल कुमार के दिल्ली, बेंगलुरु और मैसूर स्थित घरों पर भी छापेमारी कर 50 लाख नकदी और कुछ संवेदनशील दस्तावेज बरामद किए गए.

सीबीआई ने हालांकि,प्राइवेट लोगों के नाम उजागर नहीं किए हैं, लेकिन जानकारी के मुताबिक, एसएमपीपी ने एमआईएल के डायरेक्टर को घूस के बदले गोला-बारूद का टेंडर हासिल करने की कोशिश की थी. खबर ये भी है कि एसएमपीपी ने अनिल कुमार के जरिए एमआईएल के कुछ सीक्रेट दस्तावेज हासिल करने की भी कोशिश की थी. इन दस्तावेजों के एवज में भी अनिल कुमार को घूस दी गई थी.

विवादों से पुराना नाता है एसएमपीपी का

हाल में एसएमपीपी ने भारतीय सेना को लोएटरिंग म्युनिशन (आत्मघाती ड्रोन) सप्लाई किए थे. कंपनी, इससे पहले बैलिस्टिक हेलमेट भी सेना को सप्लाई कर चुकी है. कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस पंजाब के संगरूर में है जबकि कॉरपोरेट ऑफिस राजधानी दिल्ली के साउथ एक्स और ओखला में है.

ये कोई पहला मामला नहीं है जब एसएमपीपी किसी विवाद में फंसी है. इसी साल के शुरुआत में फिलीपींस ने एसएमपीपी को एक टेंडर के सिलसिले में ब्लैक लिस्ट कर दिया था. माना जा रहा है कि सीबीआई मामले के बाद कंपनी पर भारत की रक्षा मंत्रालय भी शिकंजा कर सकती है. क्योंकि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत, कोई भी कंपनी अगर किसी टेंडर इत्यादि के लिए घूस या फिर किसी दूसरे गैर-कानूनी हथकंडे अपनाती है तो उसे ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है. कुछ साल पहले भी एसएमीपी का नाम सेना को सप्लाई होने वाले ड्रोन में चीनी उपकरण लगाने को लेकर सामने आया था.

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