यूएन में रट्टू तोते की तरह कश्मीर का राग अलापने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगान को यूरोपीय देश साइप्रस ने दिया है करारा जवाब. संयुक्त राष्ट्र सभा को संबोधित करते हुए साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने दो टूक कहा कि तुर्की ने खुद उत्तरी साइप्रस और सीरिया पर कब्जा कर रखा है. ऐसे में तुर्की कौन होता है, जो दुनिया को कब्जे और ‘क्षेत्रीय अखंडता’ पर पाठ पढ़ा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने गाजा में इजरायल के कब्जे और कश्मीर का मुद्दा उठाया था. पिछले साल भी एर्दोगन ने इन दोनों मुद्दों को यूएन में उठाया था. पिछली बार भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तुर्किए को करारा जवाब दिया था. लेकिन इस बार साइप्रस ने एर्दोगन को आईना दिखाने का काम किया है. तुर्किए ने पहलगाम नरसंहार के बाद पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इस्लामाबाद को बड़ी संख्या में ड्रोन मुहैया कराए थे.
तुर्किए ने कर रखा है उत्तरी साइप्रस पर कब्जा
साइप्रस में ग्रीक और तुर्क अल्पसंख्यक लोग रहते हैं. दोनों समुदायों के बीच लंबे समय से नस्लीय विवाद चल रहा है. साल 1974 में ग्रीक समुदाय से जुड़े लड़ाकों ने द्वीप पर तख्तापलट किया था जिसके बाद तुर्की ने तुर्क समुदाय के लोगों की रक्षा का बहाना कर द्वीप पर हमला कर दिया था. इस आक्रमण के बाद साइप्रस दो हिस्सों में बंट गया, जिनमें से एक में ग्रीक-साइप्रस सरकार है और दूसरे पर तुर्क-साइप्रस वासियों का कंट्रोल है.
संयुक्त राष्ट्र सहित दुनिया का कोई भी देश तुर्की के इस क्षेत्र को मान्यता नहीं देता है. ऐसे में पीएम मोदी के बफर जोन का दौरा बेहद अहम हो जाता है. कश्मीर मुद्दा का अंतरराष्ट्रीय करण करने और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरह तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया, उसके लिए भारत कभी भी इस्तांबुल को माफ करने वाला नहीं है.
पीएम मोदी ने साइप्रस के बफर जोन का दौरा कर तुर्की की उड़ी दी थी नींद
हाल के वर्षों में भारत और साइप्रस की नजदीकियां काफी बढ़ गई है. पिछले साल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस डी-मिलिट्राइज ज़ोन पहुंचकर तुर्किए को कड़ा संदेश दिया था. ऐसे में पीएम मोदी ने तुर्किए के कट्टर दुश्मन और पड़ोसी देश साइप्रस पहुंचकर अपना समर्थन जताया था. यहां ये बताना जरूरी है कि साइप्रस उन देशों में शामिल है, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत को स्थायी सदस्य बनाने की मांग करता है.
साइप्रस के डी मिलिट्राइेज जोन में भारतीय मिलिट्री कमांडर्स की रही है तैनाती
संयुक्त राष्ट्र के आदेश पर डी-मिलिट्राइेज जोन में यूएन पीसकीपिंग फोर्स तैनात रहती है. खास बात ये है कि तुर्की से हुए सैन्य टकराव के बाद इस पीस कीपिंग फोर्स के पहले कमांडर भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल दीवान प्रेमचंद बनाए गए थे.
बफर जोन यानी यूएन प्रोटेक्टेड एरिया बनने से पहले भी भारत के टॉप मिलिट्री कमांडर्स ने साइप्रस की शांति के लिए अपने सेवाएं दी हैं. भारत के चर्चित थलसेना प्रमुख जनरल के एस थिमैया (1957-61) ने रिटायरमेंट के बाद भी साइप्रस में यूएन पीसकीपिंग फोर्स के कमांडर के तौर पर अपनी सेवाएं दी थी. 1965 में साइप्रस में तैनाती के दौरान ही उनका निधन हो गया था. यही वजह है कि साइप्रस ने वर्ष 1966 में जनरल थिमैया की याद में एक पोस्टल स्टैंप जारी किया था.
तुर्किए ने उत्तरी सीरिया पर भी कर रखा है कब्जा
तुर्किए ने स्थानीय सीरियाई विद्रोही संगठनों की मदद से उत्तरी सीरिया के एक हिस्सा पर अपना कब्जा जमा रखा है. यही वजह है कि एर्दोगन के संबोधन के समय, सीरिया के राष्ट्रपति अल जुलानी को मोबाइल फोन पर इंस्टा रील देखने में व्यस्त पाया गया था. साफ था कि जुलानी को एर्दोगन के भाषण में कतई दिलचस्पी नहीं थी.


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