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यूरोप पर रूसी खतरा, कोपेनहेगन में रक्षामंत्रियों की आपात बैठक

यूक्रेन की राजधानी कीव में ईयू के राजनयिक ऑफिस और ब्रिटिश बिल्डिंग पर अटैक किए जाने के बाद यूरोप भड़क गया है. डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई गई. इस बैठक में यूरोप के रक्षा मंत्रियों ने हिस्सा लिया और एकजुट होकर रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने पर सहमति जताई गई. साथ ही यूक्रेन को ज्यादा से ज्यादा सैन्य मदद देने को लेकर चर्चा की गई.

आपको बता दें कि रूस ने कीव पर हवाई हमला किया है, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई और एक यूरोपीय राजनयिक दफ्तर और ब्रिटेन के एक ऑफिस को नुकसान पहुंचा है. 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

यूएनएससी ने शुक्रवार को यूक्रेन पर हवाई हमलों के मामले में आपात बैठक बुलाई. यह बैठक यूक्रेन और यूरोपीय परिषद के पांच सदस्य देशों ब्रिटेन, फ्रांस, स्लोवेनिया, डेनमार्क और ग्रीस की मांग पर हुई. इस बैठक में यूरोपीय सैनिकों को यूक्रेन में तैनात किए जाने को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की.

यूरोप का मानना है कि यूरोपीय सैनिकों की तैनाती से यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है और भविष्य में अगर शांति समझौता हो तो उस पर भी पैनी नजर रखी जा सकेगी. इस बैठक में यूरोप के देशों ने एक सुर में रूस की निंदा की और यूक्रेन को और सैन्य मदद दिए जाने पर प्रतिबद्धता जताई.

यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों को भेजे जाने पर अहम चर्चा: काजा कल्लास

कोपेनहेगन में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा, “हर कोई जानता है कि पुतिन शांति के प्रयासों का मजाक उड़ा रहे हैं. ऐसे में दबाव ही एकमात्र रास्ता है जो असर करता है. यूरोपीय संघ के 27 देशों के रक्षा मंत्री रूस पर और प्रतिबंधों, यूक्रेन को अधिक हथियार आपूर्ति और युद्ध के बाद की सुरक्षा की तैयारी पर चर्चा कर रहे हैं. इसमें यह भी शामिल है कि युद्ध के बाद यूरोपीय संघ की प्रशिक्षण टीमों को यूक्रेन में भेजा जा सकता है.”

रूस और यूक्रेन पर भड़का अमेरिका, कहा, लगता नहीं दोनों युद्ध खत्म करने को तैयार हैं

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस हमले के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की आलोचना की. लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह खबर सुनकर कोई हैरानी नहीं हुई. हाल के हफ्तों में यूक्रेन ने रूस के तेल उद्योग पर भी ताकतवर हमले किए हैं. शायद दोनों ही पक्ष इस युद्ध को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं. राष्ट्रपति चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो, लेकिन दोनों देशों के नेताओं को भी ऐसा ही चाहना होगा.”

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