By Nalini Tewari
यमन में हूतियों के हमले झेल रहे सऊदी अरब की मदद करना पाकिस्तान की मुसीबत बन गया है. मक्का पैक्ट के तहत पाकिस्तान ऐसा घिरा है कि ये समझौता न तो निगलते बन रहा है और न ही उगलते. पाकिस्तान और तुर्किए ने अपने सैनिकों को सऊदी अरब भेजने की घोषणा की है.
तुर्किए और पाकिस्तान ने कहा है कि वे सऊदी अरब में सैनिकों की तेज़ी से तैनाती करेंगे, क्योंकि सऊदी अरब को यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों का सामना करना पड़ रहा है.
पाकिस्तान ने घोषणा कर तो दी है लेकिन उसकी धड़कनें बढ़ी हुई हैं, वो इसलिए क्योंकि वो जिस हूतियों के खिलाफ एक्शन लेगा, वो ईरान के ही प्रॉक्सी हैं. पाकिस्तान के इस फैसले से ईरान का भड़कना तय है, और वहीं हूतियों ने भी धमकी दी है कि अगर पाकिस्तान ने सऊदी की मदद की तो उनकी मिसाइल से इस्लामाबाद राख होगा. कुल मिलाकर न-न करते पाकिस्तान मक्का पैक्ट की लाज रखने के लिए अपने सैनिकों को भले ही सऊदी में तैनात कर रहा हो, लेकिन मुस्लिम देशों के बीच टकराव का नया समीकरण बनना तय है.
पाकिस्तान-तुर्किए-सऊदी की आपात बैठक, हूतियों के खिलाफ तैयार प्लान
रियाद में मक्का समझौते के तहत पाकिस्तान-तुर्किए और सऊदी अरब ने एक इमरजेंसी बैठक की है. इस बैठक में पाकिस्तान के फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर, उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ शामिल थे. बैठक में उन्होंने सऊदी अरब पर हाल ही में हुए हमलों, खासकर मक्का और मदीना जैसे शहरों को निशाना बनाने वाले हमलों के बारे में बात की गई.
तीनों देशों ने कहा कि वे तय की गई सैन्य ताकत और क्षमताएं उपलब्ध कराने और सऊदी अरब में अपने सैनिकों की तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे. कमेटी ने सऊदी अरब में हुए हमलों और इनके लिए ज़िम्मेदार लोगों के जवाब में अलायंस के दायरे में सामूहिक रूप से रोकने के उपाय लागू करने पर सहमति जताई.
आपको बता दें कि अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत यह तय किया गया था कि अगर समझौते में शामिल किसी एक देश पर हमला हुआ तो वह तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.
पाकिस्तान ने नहीं लिया हूतियों का नाम
मक्का समझौता कितना कागज़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान ने मक्का-मदीना जैसे शहरों पर अटैक की निंदा की, लेकिन ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का नाम नहीं लिया. कब और कितने सैनिकों को सऊदी अरब में भेजेगा इसका भी गोल-मोल जवाब दे दिया.
ये तो छोड़िए, जब सऊदी अरब पर हमलों की शुरुआत हुई तो दुनिया के तमाम देशों ने निंदा की. पाकिस्तान के मुंह से बोल तब फूटे जब वो घिर गया. पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सऊदी प्रिंस से बात करके हमलों की निंदा की. न कोई आश्वासन दिया उल्टा सऊदी अरब की सेना की कोशिशों की ही सराहना कर डाली.
बहरहाल पाकिस्तान-तुर्किए कह तो रहे हैं कि वो अपने सैनिक सऊदी अरब में तैनात करेंगे, लेकिन जो देश हूतियों का सीधे-सीधे नाम लेने से कतरा रहे हों उनसे ही सऊदी अरब उम्मीद लगा बैठा है.
हूतियों से अकेले भिड़ रही है सऊदी और यमनी सेना
यमनी सेना ने कहा कि, उसने 1000 से ज्यादा हमले किए और हूतियों की राजधानी सना के खिलाफ अभियान शुरू किया है, तो सऊदी अरब ने 100 जेट के साथ हूतियों के खिलाफ हमला बोला है.
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने कहा कि “सदस्य देश हमलों और उनके जिम्मेदार लोगों के जवाब में सेना तैनात करने पर सहमत हुए हैं.”
संयुक्त बयान में कहा गया है कि “यह तैनाती स्वीकृत व्यवस्थाओं और तीनों देशों के कानूनों के आधार पर की जाएगी.”
हालांकि, बयान में यह नहीं बताया गया कि सऊदी अरब पहुंचने के बाद सैनिक किस तरह की भूमिका निभाएंगे.


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