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ईरान जंग खत्म, ब्रह्मोस की जबरदस्त डिमांड

ईरान जंग अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई कि यूएई और पश्चिम एशिया के दूसरे देशों ने दिखाई भारत की ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने में दिलचस्पी. वही दुनिया की चुनिंदा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के एक-दो नहीं बल्कि पूरे 11 मिलिट्री बेस तबाह कर दिए थे.

ईरान जंग के दौरान, यूएई सहित बाकी खाड़ी देश रहे निशाने पर

मिडिल-ईस्ट की जंग में अगर ईरान, सुपरपावर अमेरिका और इजरायल को पटखनी देने में कामयाब हुआ तो इसका एक बड़ा कारण, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा था, जिसने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में यूएस सैन्य ठिकानों को जमकर नुकसान पहुंचाया. यूएई, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन, ओमान, कतर और इराक…कोई ऐसा मिडिल-ईस्ट का देश नहीं था, जहां ईरान की मिसाइल जाकर नहीं गिरी थी. अमेरिका की पैट्रियाट और थाड जैसी एयर डिफेंस मिसाइल तक भी ईरान की बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और कलस्टर मिसाइल के सामने फेल होती दिखाई पड़ी. 

खाड़ी देश अपनी रक्षा-सुरक्षा के लिए रहे हैं अमेरिका पर निर्भर

युद्ध के दौरान, ईरान ने लगातार खाड़ी के अपने इन पड़ोसी देशों को मिसाइल और ड्रोन अटैक की धमकी दी. इन देशों की ऑयल रिफाइनरी और तेल डिपो पर हमले किए. यूएई सहित ये ऐसे देश हैं, जो अभी तक ईरान से सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहते थे. इन देशों के पास अपनी बैलिस्टिक या फिर एयर डिफेंस मिसाइल कम हैं.

यूएई मांगे ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर

अब जब ईरान के सामने अमेरिका और इजरायल, खुद पस्त नजर आ रहे हैं तो यूएई जैसे देश अपनी रक्षा-सुरक्षा के लिए सैन्य क्षमताएं बढ़ाने में जुट गए हैं. यही वजह है कि यूएई ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की तैयारी की है. 

हाल के सालों में भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग काफी बढ़ा है. साथ में पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद…एमबीजेड के बीच भी जबरदस्त कैमिस्ट्री है. ऐसे में यूएई ने अपनी मिलिट्री पावर बढाने के लिए भारत का रूख किया है. इसका एक बड़ा कारण खुद ब्रह्मोस मिसाइल भी है जो बैटल-प्रूवन है यानी जो जंग के मैदान में अपनी ताकत को साबित कर चुकी है.

ऑपरेशन सिंदूर में साबित कर चुकी है अपनी ताकत

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, चीन और पाकिस्तान की एयर डिफेंस मिसाइल भारत की ब्रह्मोस मिसाइल को रोक पाना तो दूर, डिटेक्ट तक नहीं कर पाई थी. पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल के हमलों की जानकारी तब लगी जब 11 मिलिट्री बेस जमींदोज हो गए. यहां तक की पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तक ब्रह्मोस ने तबाह कर दिए.

पाकिस्तान ने मिसाइल हमलों से बचने के लिए चीन की एचक्यू-9 और एचक्यू-16 जैसी रक्षा प्रणाली तैनात कर रखी थी. लेकिन ये सभी ब्रह्मोस को रोकने में नाकाम रहीं. यही वजह है कि यूएई सहित दुनिया के दूसरे देशों में ब्रह्मोस मिसाइल की डिमांड बढ़ गई है. प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं भारत अपने हथियारों को मित्र-देशों को देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

पिछले महीने वियतनाम से हुआ सौदा

पिछले महीने ही भारत ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देश वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर एक डील की थी. फिलीपींस की तरह वियतनाम भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल के कोस्टल वर्जन यानी समुद्री तट से दुश्मन के जंगी जहाजों पर हमला करने वाली मिसाइल का सौदा कर रहा है. यूएई जैसे देशों का भी एक लंबा समुद्री-तट है और बंदरगाहों से लेकर समुद्री तट पर ऑयल रिफाइनरी है, ऐसे में बहुत हद तक संभव है कि यूएई भी इसी वर्जन को भारत से खरीदना चाहता है. जैसा हम जानते हैं कि वर्ष 2022 में फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल की पांच बैटरियों का सौदा किया था, और भारत ने ये सप्लाई भी कर दी हैं.

रशिया ने भी दिखाई खरीदने की दिलचस्पी

यूएई और वियतनाम के साथ-साथ,यहां दो और ऐसे देश हैं, जो भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीद सकते हैं. पहला है खुद रुस. बिल्कुल ठीक सुना आपने. ऐसी खबरें हैं कि रूस भी भारत से दुनिया की पहली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहा है. जबकि, भारत खुद रूस के साथ इस मिसाइल का साझा निर्माण करता है. लेकिन पिछले चार साल से ज्यादा समय से चल रहे यूक्रेन जंग ने रूस के मिसाइल के जखीरे को कम कर दिया है. ऐसे में रशिया भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल लेने में इंट्रस्ट दिखा रहा है.

इजरायली मिलिट्री प्रतिनिधिमंडल ने की राजनाथ से मुलाकात

इस बीच राजधानी दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक ऐसी मुलाकात की, जिसने ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर सभी के कान खड़े कर दिए. मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच इजरायल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक (डीजी) मेजर जनरल आमिर बरम (रिटायर) ने राजधानी दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद रक्षा मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर बताया कि मेजर-जनरल बरम (रिटायर) ने भारत के रक्षा मंत्री से इंडिया इजरायल स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की. 

इस मीटिंग के दौरान सभी का ध्यान, राजनाथ सिंह के ऑफिस में रखे ब्रह्मोस मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम के मॉडल ने खींच लिया. ये महज इत्तेफाक भी हो सकता है. लेकिन इस मीटिंग के अगले ही दिन, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा बयान देकर कह दिया कि इजरायल भी हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रहा है. 

अभी तक इजरायल भी अमेरिका पर अपने हथियारों के लिए ज्यादा निर्भर रहता था. लेकिन ईरान से जंग के दौरान, इजरायल को भारी नुकसान उठाना पड़ा. ईरान की मिसाइलों के मुकाबले इजरायल के जखीरे में कोई आधुनिक मिसाइल नहीं दिखाई पड़ी. इजरायल को ईरान पर हमला करने के लिए मिसाइल अटैक के लिए लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करना पड़ा था. अमेरिका के जखीरे में भी 90 के दशक की टॉमहॉक मिसाइल के अलावा जमीन से जमीन पर मार करने वाली कोई दूसरी मिसाइल नहीं थी.

इसके अलावा जंग के बीच जिस तरह ईरान और लेबनान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ठन गई है, ऐसे में इजरायल भी अपने हथियारों के लिए आत्मनिर्भर बनना चाहता है. तो क्या आने वाले दिनों में इजरायल भी भारत से ब्रह्मोस खरीद सकता है. वो इजरायल, जो कभी भारत को बराक मिसाइल से लेकर हेरोन, सर्चर और दृष्टि ड्रोन सप्लाई करता था.

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