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अजय रहेगी भारतीय नौसेना, शत्रु को गर्त में डुबोने आया एंटी-सबमरीन जहाज

दुश्मन की पनडुब्बियों और जंगी जहाज के लिए काल माने जाने वाले स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) के आठवें और अंतिम जहाज, अजय (यार्ड 3034) को सोमवार को कोलकाता में समंदर में लॉन्च किया गया. कोलकाता के गार्डन रीच शिपयार्ड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने इस बेहद खास जंगी जहाज को तैयार करने का बीड़ा उठाया है.

आईएनएस अजय को जीआरएसई, कोलकाता में भारतीय नौसेना के चीफ ऑफ मैटेरियल (सीओएम) वाइस एडमिरल किरण देशमुख की उपस्थिति में लॉन्च किया गया. नौसेना की परंपरा को ध्यान में रखते हुए, वाइस एडमिरल देशमुख की धर्मपत्नी प्रिया देशमुख ने जहाज का शुभारंभ किया. इस अवसर पर भारतीय नौसेना और जीआरएसई के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

पिछले महीने यानी 18 जून को इस श्रेणी के पहले जंगी जहाज आईएनएल अर्नाला को भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल किया गया था. दूसरे जहाज की डिलीवरी अगस्त 2025 में होने की संभावना है.

आईएनएस अजय की ताकत जानिए

यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की पानी के भीतर की सतर्कता, पनडुब्बी रोधी युद्ध और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को बढ़ाएगा. यह जहाज भूमिका निर्धारित करने वाले सेंसर जैसे कि हल माउंटेड सोनार और लो फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (एलएफवीडीएस) से लैस है.

अजय की मारक क्षमता अत्याधुनिक टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट, एनएसजी-30 गन और 12.7 मिमी एसआरसीजी द्वारा प्रदान की गई है. यह जहाज डीजल इंजन द्वारा और वाटर जेट द्वारा संचालित है.

जहाज निर्माण, हथियारों, सेंसरों और उन्नत संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में आत्मनिर्भरता की भारतीय नौसेना की निरंतर खोज में अजय का प्रक्षेपण एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, यह जहाज भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल का प्रतीक है.  

भारतीय नौसेना के मुताबिक, अजय हिंद महासागर क्षेत्र में राष्ट्रीय समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण क्षमता प्रदान करेगा.

नौसेना के लिए बन रहे 16 एंटी-सबमरीन वारफेयर जहाज

भारतीय नौसेना के लिए इस वक्त 16 ऐसे एएसडब्ल्यू-एसडब्लूसी जहाज बनाए जा रहे हैं. आईएनएस अर्नाला इस श्रेणी का पहला जहाज है. जहाज को महाराष्ट्र के वसई स्थित ऐतिहासिक अर्नाला किले का नाम दिया गया है. अर्नाला समेत कुल 08 जहाज जीआरएसई कोलकाता में तैयार किए जा रहे हैं. बाकी 08 कोचीन शिपयार्ड में निर्माणाधीन हैं. (एंटी-सबमरीन जहाज तैयार, समुद्री-तट पर दिखेगा शौर्य)

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