जो देश अपने चुनाव का परिणाम तय करने के लिए कोर्ट जाते हैं, वो हमें बता रहे हैं कि चुनाव कैसे कराए जाएं ? पश्चिमी देशों को ये खरी-खरी सुनाई है भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने.
जयशंकर मोदी सरकार में एक ऐसे नेता, ऐसे मंत्री, ऐसे कूटनीतिज्ञ हैं जिनके सामने पश्चिमी देश पस्त हैं. अपने स्पष्ट बोल और हाजिर जवाबी से अच्छे अच्छे दुश्मन देशों को दोस्त बनाने में माहिर हैं. जयशंकर ने एक बार फिर से भारत के खिलाफ अमेरिका और कनाडा के आरोपों पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि “वो हमें प्रभावित करना चाहते हैं. अमेरिका और कनाडा ही नहीं कई देशों को लगता है कि उन्होंने पिछले 70-80 साल तक हमें प्रभावित किया है तो, यहां भी कर लेंगे.”
अमेरिका-कनाडा को जयशंकर ने सुनाया
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में एस जय़शंकर ने अमेरिका और कनाडा पर पलटवार किया है. जयशंकर ने चुनावी प्रक्रिया पर पश्चिमी देशों के भारत को दिए जा रहे ‘ज्ञान’ पर नाराजगी जताई. एस जयशंकर ने कहा है कि “पश्चिमी देशों को सच में ऐसा लगता है कि उन्होंने पिछले 200 वर्षों से दुनिया को प्रभावित किया है, आप उस स्थिति में रहने वाले किसी व्यक्ति से उन पुरानी आदतों को इतनी आसानी से छोड़ने की उम्मीद कैसे करते हैं. वे एक ऐसे भारत को देख रहे हैं जो भारत की छवि के अनुरूप नहीं है. जिन देशों को अपने चुनाव का परिणाम तय करने के लिए अदालत जाना पड़ता है, वे हमें इस बारे में ज्ञान दे रहे हैं कि चुनाव कैसे आयोजित किया जाए.”
ईरानी डील पर अमेरिकी प्रतिबंध पर जयशंकर की दो टूक
कोलकाता में अपनी किताब ‘व्हाई भारत मैटर्स’ के बांग्ला संस्करण के विमोचन के दौरान एस जयशंकर से ईरान के साथ चाबहार पोर्ट के लिए हुई डील पर अमेरिका की तरफ से प्रतिबंध की धमकी दिए जाने पर सवाल पूछा गया तो एस जयशंकर ने कहा कि अमेरिका को संकीर्ण सोच से बचने की सलाह दे डाली. एस जयशंकर ने कहा, “मैंने कुछ बयानों को पढ़ा है लेकिन मेरा मानना है कि भारत-ईरान डील प्रभावी संचार, आपसी भरोसे और समझदारी को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम है जो सभी के लिए फायदेमंद हैं. लोगों को इस समझौते को लेकर संकीर्ण सोच नहीं रखनी चाहिए.”
भारत-चीन के संबंधों पर क्या है विदेश मंत्री का बयान ?
भारत-चीन के संबंधों को लेकर एक बार फिर विदेश एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है. एस जयशंकर ने एलएसी पर सैनिकों की तैनाती को असामान्य बताते हुए कहा है कि हम सुरक्षा की अनदेखी नहीं कर सकते हैं. एस जयशंकर ने कहा है कि “अब जो बदला है, वह साल 2020 में हुआ. चीन ने कई समझौतों का उल्लंघन करते हुए हमारी सीमा पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया और उन्होंने उस समय ऐसा किया, जब हमारे यहां कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन लगा था. हालांकि, भारत ने जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों की तैनाती की और अब सैनिकों को गलवान में सामान्य बेस पोजीशन से आगे तैनात किया गया है.”
एस जयशंकर ने भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों के बारे में कहा कि “चीन के साथ कई मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय संबंधों की वापसी और सीमा की शांति पर निर्भर है. पर भारतीय नागरिक के रूप में दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए किसी को भी देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, आज यह एक चुनौती है.”
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