ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपने वालिद यानी पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे से दूरी क्यों बनाई है. क्या इसके पीछे अमेरिका और इजरायल का खौफ है या कोई दूसरा कारण है. पूरी दुनिया आज इसी सवाल का जवाब जानना चाहती है.
28 फरवरी से नहीं दिखे मोजतबा खामेनेई, अपने पिता के अंतिम संस्कार में सुरक्षा कारणों के चलते शामिल नहीं हुए. 3 और 4 जुलाई को जब अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, तब ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई नहीं दिखे. ईरान ने अली खामेनेई को शहीद का दर्जा दिया है. ऐसे में ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान से लेकर संसद के स्पीकर गालिबाफ और आईआरजीसी चीफ अहमद वाहिदी समेत सभी उच्च अधिकारियों, मंत्रियों और टॉप मिलिट्री कमांडर्स ने भरी आंखों से नम विदाई दी. लेकिन पिछले चार महीने से जिस शख्स को देखने को दुनिया बेताब थी वो नहीं दिखी. यानी मोजतबा खामेनेई.
28 फरवरी के हमले में बाल-बाल बची थी जान
28 फरवरी को जब ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के घर पर अमेरिका और इजरायल ने एयरस्ट्राइक की थी तब मोजतबा भी वहां मौजूद थे. लेकिन जिस वक्त बम गिराए गए, उससे चंद मिनट पहले मोजतबा हॉल में चल रही मीटिंग से बाहर निकलकर आंगन में पहु्ंच गए थे. ऐसे में मोजतबा बच गए लेकिन गंभीर रूप से घायल हो गए थे. अमेरिका और इजरायली खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक मोजतबा खामेनेई बेहद गंभीर हालत में हैं, या कोमा में हो सकते हैं. कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा जाता है कि ईरान ने गुपचुप तरीके से मोजतबा को रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचा दिया है, जहां ईरान के नए सुप्रीम लीडर का इलाज चल रहा है. वहीं ईरान का दावा है कि मोजतबा सुरक्षित हैं और ठीक अवस्था में हैं. लेकिन सुरक्षा कारणों से दुनिया के सामने नहीं आएंगे.
मोजतबा खामेनेई ईरानी जनता के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए एक पहेली बने हुए हैं. लोगों को उम्मीद थी कि 04 महीने बाद अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए हो रहे कार्यक्रमों में जहां वैश्विक नेता पहुंच रहे हैं, वहां मोजतबा पहली बार दिख सकते हैं. लेकिन अनहोनी का आशंका के चलते मोजतबा अपने पिता के जनाजे को अंतिम विदाई नहीं दी.
अंतिम दर्शन में भारत, चीन, रूस और सऊदी के प्रतिनिधियों सहित दर्जन देश हुए शामिल
दरअसल ईरानी सुरक्षा एजेंसियों को इजराइली हमले का डर है इसलिए उन्होंने मोजतबा को अंतिम संस्कार समारोह से दूर रहने की सलाह दी है. हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई और आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. ईरानी खुफिया एजेंसियो को डर इस बात का ही नहीं है कि हमला जनाजे में हो सकता है. क्योंकि अंतिम यात्रा के दौरान भारत, रूस, चीन, सऊदी अरब सहित कई दर्जन देशों के प्रतिनिधि भी अली खामेनेई को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे हैं.
ईरान एजेंसियों को मोजतबा के मूवमेंट ट्रैक होने का खतरा
ईरान को डर इस बात का भी हो सकता है कि अगर मोजतबा अपने वालिद के जनाजे में पहुंचे, ऐसी स्थिति में इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद, मोजतबा खामेनेई के मूवमेंट को ट्रैक कर सकती है और फिर बाद में अटैक कर सकती है. ठीक वैसे जैसे युद्ध के दौरान, इजरायल ने ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) को सड़क पर एक प्रदर्शन के दौरान ट्रैक किया और फिर बाद में उस घर पर अटैक कर मार गिराया, जहां वे सीक्रेट ठिकाना बनाए हुए थे.
मोजतबा के सीक्रेट ठिकाने को नहीं ढूंढ पाए अमेरिका और इजरायल
माना जा रहा है कि इजरायल की धमकी के कारण ही मोजतबा खामेनेई को सामने नहीं लाया जा रहा है, क्योंकि उन्हें ऐसे सीक्रेट जगह पर रखा गया है, जहां ईरानी राष्ट्रपति तक मोजतबा से नहीं मिल सकते. वहीं मोजतबा को सार्वजनिक तौर पर सामने न लाने का एक कारण ये भी हो सकता है कि सच में मोजतबा गंभीर तौर पर घायल हैं और चलने में नाकाम हैं. वे कोमा में भी हो सकते हैं. ऐसे में अगर दुनिया के सामने मोजतबा को ऐसी हालत में लाया जाएगा तो ईरान का मनोबल गिरेगा और अमेरिका-इजरायल को और हमलों का मौका मिल जाएगा.
पत्नी के जनाजे से भी किया मोजतबा ने किनारा
खास बात है कि मोजतबा ने अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा नहीं लिया था. मोजतबा की पत्नी की मौत भी अली खामेनेई के साथ अमेरिका और इजरायल के हमले में हुई थी. इसके अलावा, मोजतबा की बहन यानी अली खामेनेई की बेटी, दामाद और एक छोटी नातिन की भी हमले में मौत हुई थी. परिवार के सदस्यों के अलावा ईरान के करीब 30 टॉप लीडर्स और कमांडर्स भी इसे हमले में मारे गए थे. बावजूद इसके ईरान झुका नहीं और अमेरिका-इजरायल को कड़ी टक्कर दी. अली खामेनेई के जनाजे को भी ईरान ने दुनिया के सामने अपने शक्ति-प्रदर्शन के तौर पर पेश किया. लेकिन मोजतबा के सामने ना आने से ईरान का डर साफ दिखने लगा. यानी अली खामेनेई को खोने के बाद ईरान अब मोजबता को खोना नहीं चाहता है.
एमओयू के बावजूद ईरान को अमेरिका पर कम विश्वास
जानकारों का मानना है कि मोजतबा को जनाजे में शामिल ना होने का फैसला सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया है. क्योंकि अमेरिका के साथ शांति समझौता हो गया हो, लेकिन दोनों पक्षों के बीच में अविश्वास है और इजरायल के साथ भी तनाव बना हुआ है.
17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एमओयू साइन हुआ था. इस एमओयू के साथ दोनों देशों के बीच युद्धविराम हो गया था. लेकिन इसके बाद भी अमेरिका ने दो बार ईरान पर एयर स्ट्राइक की. क्योंकि ईरान ने होर्मुज में सिविल जहाजों को निशाना बनाया था. यही वजह है कि ईरान, अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में भी फूंक फूंक कर कदम रख रहा है. भले अंतिम संस्कार में डेढ़-दो करोड़ लोगों की भीड़ जरूर जुटी है.
अली खामेनेई को 9 जुलाई को ईरान के मशहद में दफनाया जाएगा यानी सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. इससे पहले ईरान के कोम और दूसरे शहरों में भी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी.
इजरायल के रक्षा मंत्री काट्ज ने दी मोजतबा को धमकी
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा था कि “ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई निशाने पर हैं. इसी सप्ताह काट्ज ने कहा था कि “ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा सहित जो भी नेता इजरायल को खत्म करने की योजना बनाएगा, वह उनका सीधा टारगेट होगा. ईरान के उत्तराधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनका खात्मा इजरायल का लक्ष्य है.” इस बयान पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पलटवार किया. अराघची ने कहा, ईरान अपने नेतृत्व पर किसी भी खतरे का जोरदार जवाब देगा.

