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खामेनेई के जनाजे में IRGC चीफ, मोसाद एक्टिव

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक में मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के जनाजे में एक ऐसा चेहरा नजर आया है, जिसपर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायल की घातक मोसाद की नजरें टिक गई हैं.

वो चेहरा है ईरान के सबसे खूंखार और ताकतवर जनरल अहमद वाहिदी का. यही वो चेहरा है, जिसके कारण अमेरिका के सुपरपावर वाली छवि पर काला धब्बा लग गया है. जिस तरह से आईआरजीसी ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा संभाला और बड़े-बड़े सैन्य चेहरों यहां तक की ईरानी एनएसए अली लारीजानी की मौत के बाद भी ईरानी सेना के इरादे डिगे नहीं, उसके पीछे यही जनरल अहमद वाहिदी थे.

आईआरजीसी चीफ जनरल अहमद वाहिदी तेहरान स्थित खामेनेई के पुराने आवास के पास आयोजित एक छोटे शोक समारोह में उनके ताबूत के पास बैठे दिखाई दिए. उसी घर में जहां अयातुल्ला खामेनेई एयरस्ट्राइक के शिकार हुए थे.

खामेनेई के ताबूत के पास आईआरजीसी चीफ, कई महीनों से थे गायब

खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार के कार्यक्रम के बीच आईआरजीसी चीफ कमांडर जनरल अहमद वाहिदी कई महीनों बाद ईरानी लोगों को नजर आए. ईरान में युद्ध शुरू होने से कई सप्ताह पहले से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए थे. युद्ध शुरु होने से पहले कुछ सप्ताह में जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ दबाव बनाना शुरु किया, उसी वक्त से जनरल वाहिदी अंडरग्राउंड थे और ईरानी सेना को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार कर रहे थे.

जनरल वाहिदी की आशंका सही भी साबित हुई, 28 फरवरी को जब अमेरिका ने तेहरान पर बड़ा हमला किया, तो सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ सभी शीर्ष कमांडर मारे गए, लेकिन वाहिदी के मौके पर मौजूद न होने के कारण जान बच गई.

28 फरवरी के बाद अपने छिपे ठिकाने से ही जनरल वाहिदी ने आईआरजीसी की कमान संभाली और अमेरिका के खिलाफ चक्रव्यूह रचते रहे. अब जब अमेरिका-ईरान के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुका है तो लंबे समय बाद सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए.

मोजतबा के संपर्क में वाहिदी, ईरान के बड़े निर्णयों में शामिल

जनरल अहमद वाहिदी को अयातुल्ला खामेनेई का दाहिना हाथ माना जाता है. अयातुल्ला खामेनेई आंख मूंदकर अपने आईआरजीसी जनरल पर विश्वास करते थे. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नए सुप्रीम लीडर और अयातुल्ला के बेटे मोजतबा खामेनेई को भी जनरल वाहिदी रास्ता दिखा रहे हैं.

मोजतबा खामेनेई कहां हैं, किस स्थिति में हैं, ये किसी को नहीं पता. यहां तक कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची तक को मोजतबा से नहीं मिलने दिया जा रहा. लेकिन जनरल वाहिदी की मोजतबा तक पहुंच है. और उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जो मोजतबा खामेनेई से सीधे मिलते हैं.

दावा किया जा रहा है कि मोजतबा को क्या बोलना है, कैसे बोलना है, और कब बोलना है, ये सब निर्णय भी आईआरजीसी चीफ जनरल वाहिदी के ही हाथों में है. जनरल वाहिदी इस समय ईरान की उस रणनीतिक टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं, जो अमेरिका के साथ युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए संभावित बातचीत में ईरान का कड़ा रुख तय कर रही है.

मोसाद-सीआईए की नजर में आईआरजीसी चीफ

जनरल वाहिदी ईरान की ‘कुद्स फोर्स’ के पहले कमांडर रह चुके हैं और उन्हें बेहद कठोर और रणनीतिक रूप से आक्रामक सैन्य कमांडर माना जाता है. अयातुल्ला खामेनेई और एनएसए अली लारीजानी की मौत के बाद आईआरजीसी चीफ भी अमेरिका-इजरायल के टारगेट पर है. सीआईए और मोसाद जैसी एजेंसियां सरगर्मी से तलाश कर रही थी.

लेकिन अब जब आईआरजीसी नजर आए तो ठीक उसी जगह जिस घर में खामेनेई की मौत हुई थी.

युद्ध के दौरान जनरल वाहिदी ने अपने जवानों का जोश बनाए रखा था. और अमेरिका-इजरायल को अपना दुश्मन बताते हुए कहा था कि “ईरान अपनी ताकत के चरम पर है और यदि अमेरिका या इजरायल ने पिछली गलतियों को दोहराया, तो ईरान पश्चिम एशिया के बाहर भी जवाबी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

यहां तक की होर्मुज को लेकर भी बयान जारी करते हुए जनरल वाहिदी ने कहा था कि जब तक होर्मुज से अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त नहीं होगी, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी. यानि शांति वार्ताओं को लेकर जनरल का रुख बेहद आक्रामक है.

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