फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की औपचारिक मुलाकात से पहले अमेरिका ने दबाव बनाने की कोशिश की है. भारत को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जब भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास आ गई है तो अमेरिका ने इसका नाम फिर से बदल दिया है. पेंटागन ने ये कदम ठीक उस वक्त उठाया है, जब मोदी-ट्रंप के बीच बैठक होने वाली है.
हवाई द्वीप स्थित इस कमांड की जिम्मेदारी हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक की है. इसी के अंतर्गत अमेरिका की सेवंथ फ्लीट (सातवां बेड़ा) आता है, जिसने 1971 की जंग में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद करने की कोशिश की थी.
पेंटागन ने पलटा 8 साल पहले का फैसला
अमेरिका की इंडो पैसिफिक कमांड ने अपना नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर लिया है. 8 साल पहले ट्रंप सरकार के दौरान ही इसका नाम बदला गया था. करीब आठ साल पहले, ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने इस कमांड का नाम इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था. क्योंकि भारत और अमेरिका के मजबूत संबंध हो रहे थे. लेकिन बुधवार को इसका नाम फिर से बदलकर पैसिफिक कमांड कर दिया गया है.
अमेरिकी रक्षा विभाग ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि “यह बदलाव कमांड के ऐतिहासिक गौरव और विरासत को सम्मान देने के लिए किया गया है. इस कमांड की स्थापना साल 1947 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने की थी.”
रक्षा विभाग के बयान के अनुसार, “1 जनवरी 1947 को स्थापित यह कमांड 70 वर्षों से अधिक समय तक यूएस पैसिफिक कमांड के नाम से संचालित होती रही. यह अमेरिका की एकीकृत सैन्य कमांडों में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कमांड है.”
बयान में कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और अनेक मानवीय अभियानों के समन्वय तक, यूएस पैसिफिक कमांड का नाम सैन्य विरासत और क्षेत्रीय साझेदारियों का प्रतीक रहा है.”
पेंटागन ने कहा, “नाम बदलने के बावजूद कमांड के अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका संचालन क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है. कमांड का मूल मिशन और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र एवं खुले क्षेत्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह जारी रहेगी.”
पीएम मोदी संग द्विपक्षीय वार्ता से पहले ट्रंप की मंशा पर उठे सवाल
साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड करने की घोषणा की थी. मैटिस ने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक परस्पर जुड़ाव को देखते हुए यह बदलाव किया गया है. यह कमांड ‘बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक’ फैले विशाल क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है और अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में इसकी अहम भूमिका है.
बुधवार को ठीक ट्रंप और पीएम मोदी की बैठक से पहले जिस तरह से पेंटागन ने कमांड का नाम बदला है, उसे भारत पर दबाव की नीति के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ही अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2018 में ही भारत संग अच्छे संबंधों के चलते कमांड का नाम बदला था. लेकिन ट्रंप सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आई है.
पहले टैरिफ को लेकर और फिर ऑपरेशन सिंदूर में युद्धविराम के मुद्दे पर भारत और अमेरिकी सरकार के बीच मतभेद दिखे हैं. ट्रंप अपनी शर्तों के साथ ट्रेड डील करना चाहते थे, लेकिन भारत ने अपनी शर्तों के हिसाब से ट्रेड डील को मंजूरी दी है.


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