ईरान की मॉस्किटो फ्लीट की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जमकर तारीफ की है. मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध में जिस तरह से अमेरिकी को ईरान ने छकाया है, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तेहरान के कायल हो गए हैं.
पुतिन ने अपने नौसेना अधिकारियों से यहां तक कह दिया है कि उन्हें भी ऐसी मॉस्किटो फ्लीट का इस्तेमाल रूस को भी करना चाहिए.
दरअसल ईरान की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ बड़े-बड़े युद्धपोतों और विमान वाहक पोतों वाली पारंपरिक नेवी से बिलकुल अलग है, जिसमें सैकड़ों छोटी-हल्की और तेज नाव हैं. इन नावों का इस्तेमाल करके ईरान अपने से कई ज्यादा बड़े दुश्मनों को पीछे होने पर मजबूर कर देती है, जैसा कि हालिया संघर्ष में देखने को मिला है.
आपको बता दें कि ईरान की इस मॉस्किटो फ्लीट में लगभग 20 गदीर-क्लास की छोटी पनडुब्बियां और हजारों तेज रफ्तार मिसाइल और असॉल्ट बोट शामिल हैं.
ईरान की तर्ज पर रूस बनाएगा मॉस्किटो फ्लीट!
मिडिल ईस्ट में भड़की जंग और अपने पारंपरिक मित्र ईरान से यूक्रेन के हुए टकराव के बाद रूसी राष्ट्रपति एक्शन में हैं. पुतिन ने अपने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ एक बैठक की. इस बैठक में ईरान की मॉस्किटो फ्लीट चर्चा का केंद्र रही.
पुतिन ने कहा कि “मध्य पूर्व के संघर्ष वाले इलाके में ईरान की ‘मॉस्किटो फ्लीट’ (छोटी और तेज़ नावों का बेड़ा) काफ़ी असरदार रही है.
पुतिन ने अपने अधिकारियों से ईरानी नौसेना की तारीफ करते हुए कहा, “ईरान ने अमेरिका के साथ सैन्य टकराव के दौरान “मच्छर बेड़े” (छोटी, तेज़ गति वाली नौकाओं) को सफलतापूर्वक तैनात किया, और यह बल बेहद प्रभावशाली रहा साबित हुआ.
पुतिन ने मॉस्किटो फ्लीट (मच्छर बेड़े) को नई टेक्नोलॉजी वाला बताया है. साथ ही खुलासा किया कि “रूस भी ऐसी ही क्षमताएं विकसित कर रहा है — यानी छोटे जहाज जिनमें कैलिबर मिसाइल जैसे आधुनिक हथियार लगे हों, जो किसी भी दुश्मन पर सटीक और ज़बरदस्त हमला कर सकें.”
मॉस्किटो फ्लीट से ही होर्मुज पर ईरान का दबदबा है कायम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही बार-बार करें कि ईरान की नेवी समाप्त हो चुकी है, लेकिन दुनिया जानती है कि होर्मुज पर अभी भी ईरान का प्रभुत्व कायम है. होर्मुज में इसी मॉस्किटो फ्लीट के चलते ईरान ने अमेरिका की नाक में दम किया हुआ है.
इस बेड़े की खासियत ये है कि हल्के और फुर्तीले होने के कारण, इन जहाजों को ईरान के पथरीले तट पर बनी सुरंगों में छिपाया जा सकता है, जिससे अमेरिका के लिए लंबी दूरी के हथियारों से इन्हें नष्ट करना मुश्किल हो जाता है.
आईआरजीसी के ये छोटे जहाज अमेरिकी सेना के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक चुनौती बने हुए हैं, क्योंकि इन छोटी नावों पर मिसाइलें, बंदूकें और दूसरे हथियार तैनात हैं, जो दुश्मन को समय-समय पर मात देते हैं.
संकरे रास्ते में जहां बड़े-बड़े युद्धपोत फेल हो जाते हैं, वहां ये नाव आसानी से रास्ता तय करती हैं, और दुश्मनों पर हमला करती हैं.
यह फ्लीट समुद्र में एक छापामार बल या यूं कहें तो गुरिल्ला युद्ध करती है, दुश्मनों पर अटैक करती है और फौरन भागने में सक्षम है. ये नावें करीब 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आती हैं. युद्धपोत को घेर लेती हैं, ड्रोन या मिसाइल दागती हैं और फिर रडार पर बिना दिखे, छिप जाती हैं.
इन्हें पथरीले समुद्री तटों पर नाई गई गहरी गुफाओं के अंदर बने घाटों पर बांधकर रखा जाता है. जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत उतार दिया जाता है. आत्मघाती ड्रोन और मिसाइलों से लैस ये नावें दुश्मनों का काम तमाम करके ही दम लेती हैं.

