By Nalini Tewari
अमेरिका के तमाम दबाव के बावजूद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के सामने बता दिया कि आखिर रूस, भारत के लिए क्यों अहम है. भारत और रूस की दोस्ती क्यों अटूट है. पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी देशों के तमाम तरह के बेबुनियादी आरोपों के बावजूद भारत-रूस एकदूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं.
म्यूनिख में एक कार्यक्रम के दौरान एस जयशंकर ने बड़ा बयान देते हुए कहा, जब पूरी दुनिया पाकिस्तान के साथ खड़ी थी, तब रूस ने भारत का साथ दिया. जब हमारी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब सोवियत संघ (रूस) ही वो देश था, जो भारत की ताकत बना. रूस ने भारत का साथ दिया.
एस जयशंकर का ये बयान अमेरिका के परिपेक्ष में देखा जा रहा है, कि रूस के साथ व्यापार के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश में हैं, हाल ही में अमेरिका में एक बिल पास हुआ है, जिसमें रूस-ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है.
जब बड़े देश पड़ोसी सैन्य शासक के साथ थे, तब रूस भारत के साथ खड़ा था: जयशंकर
दिल्ली में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने कहा कि, “भारत-रूस के रिश्ते लंबे समय से अच्छे रहे हैं. नई दिल्ली के लिए मॉस्को के साथ रिश्ते सिर्फ आज की स्थिति से तय नहीं होते. भारत और रूस के बीच 1950 के दशक से ही मजबूत संबंध रहे हैं.”
जयशंकर ने बेबाकी से रूस के साथ संबंधों पर बात करते हुए कहा, “ उस इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता. रूस, जो पहले सोवियत संघ था, कई मौकों पर हमारे साथ खड़ा रहा, जब हमारी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी. ऐसे समय में जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोसी देश में सैन्य शासन (पाकिस्तान) का समर्थन कर रहा था, रूस एक ऐसा देश था जिसके साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे थे, और उस विरासत ने कई तरह से हमारे संबंधों को आकार दिया है.”
आपको बता दें कि रूस ने बीते 70 साल में कश्मीर समेत 4 अहम मसलों पर भारत का समर्थन किया है.
दोस्त होने के बावजूद पीएम मोदी के युद्ध पर सवाल उठाते हैं, निष्पक्ष : पुतिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोस्ती के कारण भारत-रूस के संबंध और गहरे हो रहे हैं. दोनों की गहरी मित्रता का अंदाजा इसी बाद से लगाया जा सकता है कि मोदी बेझिझक रूस-यूक्रेन के युद्ध पर सवाल खड़े करते रहे हैं और वो भी पुतिन के सामने. इस बात का जिक्र हाल में ही पुतिन ने भी एक कार्यक्रम में किया था.
रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में पुतिन ने पीएम मोदी की कोशिशों की बात की. पुतिन ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन वैश्विक नेताओं में से एक हैं जो हमारे बहुत अच्छे और दोस्ताना रिश्तों, और व्यक्तिगत अच्छे संबंधों के बावजूद, लगातार यूक्रेन में संघर्ष को खत्म करने का मुद्दा उठाते हैं और इस बारे में सवाल पूछते हैं.”
पुतिन ने कहा, “पीएम मोदी आपसी सहमति वाले समाधानों के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं. पीएम मोदी की गहरी दिलचस्पी है और उनके पास आपसी सहमति वाले समाधान खोजने के लिए बहुत अच्छे विचार हैं. इस लिहाज से, स्वाभाविक रूप से, प्रधानमंत्री निष्पक्ष रुख अपनाते हैं और संघर्ष को खत्म करने में उनकी दिलचस्पी है, मुझे लगता है कि यह बात सीधे तौर पर कहना मेरा कर्तव्य है और हम प्रधानमंत्री के विचारों के लिए उनके आभारी हैं.”
पुतिन ने कहा, “हम भी चाहते हैं कि जल्द युद्ध समाप्त हो और हमें पीएम मोदी का आइडिया अच्छा लगा, लेकिन इसके बारे में ज्यादा बात नहीं करूंगा.”
तेजी से बदल रहा ग्लोबल ऑर्डर: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत में अगले पांच से दस सालों में ग्लोबल पावर की रैंकिंग में तेजी ऊपर उठने की क्षमता है. जयशंकर के पूछा गया कि अगले पांच से दस सालों में ग्लोबल ऑर्डर में भारत की स्थिति क्या होगी.
जिसके जवाब में जयशंकर ने कहा, “जिन देशों को अभी मिडिल पावर माना जाता है, जरूरी नहीं कि वे सभी एक ही रास्ते पर चलें. कुछ शक्तियां ज्यादा मिडिल और कुछ अपर मिडिल हैं. भारत के सामने तेज विकास के कई दशक हैं और इसकी डोमोग्राफिक प्रोफाइल उस विकास को बनाए रखने में मदद कर सकती है. ग्लोबल पावर की रैंकिंग में बदलाव एक जैसा नहीं होगा, जो देश अभी ‘मिडिल पावर’ के तौर पर एक साथ गिने जाते हैं, वे भविष्य में अलग-अलग दिशाओं में जा सकते हैं.”
जयशंकर ने कहा, “मिडिल पावर्स में से कुछ आगे निकल जाएंगे, कुछ वहीं बने रहेंगे, और कुछ शायद थोड़ा पीछे छूट जाएंगे. ये सब ग्लोबल ऑर्डर में बदलाव का हिस्सा होगा.”

