ईरान जंग के बीच, करीब 23 साल बाद यूएस फोर्सेज इराक छोड़ने जा रही हैं. इराक के प्रधानमंत्री अली अल जैदी ने घोषणा की है कि 30 सितंबर को अमेरिका सेना पूरी तरह से इराक छोड़कर चली जाएगी. हाल के मिडिल-ईस्ट जंग में ईरान ने इराक स्थित यूएस मिलिट्री बेस को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया था.
तत्कालीन इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को पकड़ने के लिए आई अमेरिकी (और नाटो फोर्सेज) ने इराक के खिलाफ वर्ष 2003 में खाड़ी युद्ध-2 छेड़ा था. सद्दाम हुसैन के तख्तापलट, जेल जाने और फांसी की सजा के बावजूद यूएस फोर्सेज़ इराक में थी. एक समय में अकेले इराक में अमेरिका के करीब 1.70 लाख सैनिक तैनात थे. हालांकि, 2011 में भी अमेरिका ने इराक छोड़ने का ऐलान किया था लेकिन 2014 में आतंकी संगठन आईएसआईएस से लड़ने के नाम पर फिर से यूएस फोर्सेज इराक में तैनात कर दी गई थी.
ईरान ने जंग के दौरान अमेरिका के इरबिल एयरबेस को पहुंचाया जबरदस्त नुकसान
यूएस फोर्सेज ने पश्चिमी देशों की मदद से बनाए गए एक खास मिलिट्री संगठन के साथ मिलकर 2021-22 तक इराक से आईएस का लगभग सफाया कर दिया था. इराक के अलावा सीरिया से भी आईएस का खात्मा हो चुका है. लेकिन फिर भी अमेरिका सेना, इराक में रूकी रही. यूएस फोर्सेज अब मुख्यत इराक के कुर्दिस्तान प्रांत में मौजूद थी, जहां इरबिल मिलिट्री बेस है. इसके अलावा इराक की राजधानी बगदाद के वीआईपी ग्रीन जोन में अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी सीआईए (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) के फील्ड ऑफिस सहित टॉप मिलिट्री कमांडर्स का रिहायश था. वर्ष 2024 में भी अमेरिका ने इराक को छोड़ने का ऐलान किया था.
इराक के प्रधानमंत्री अली अल जैदी के ऐलान पर अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. खास बात है कि एक दिन पहले, जैदी ने अमेरिका की सेंट्रल कमान के कमांडर जनरल कूपर से मुलाकात की थी. उसके बाद ही जैदी ने यूएस फोर्सेंज छोड़ने का ऐलान किया था.
पिछले पांच महीने से चल रही मिडिल-ईस्ट जंग में ईरान ने कई बार एरबिल और इराक में दूसरे अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बड़े अटैक किए थे. तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने इन मिलिट्री बेस से ईरान पर मिसाइल अटैक किए थे. इन हमलों में अमेरिकी सैनिक हताहत भी हुए थे. ईरान ने बगदाद में ग्रीन जोन और यूएस दूतावास को भी ड्रोन हमलों में नहीं बख्शा था.
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन के लिए कुर्द लड़ाकों को किया तैयार
ईरान के खिलाफ जंग में खास बढ़त ना मिलने के बाद माना जा रहा था कि यूएस फोर्सेंज इराक के बॉर्डर से ईरान पर ग्राउंड ऑपरेशन लॉन्च करेंगी. लेकिन अब इसकी संभावना काफी क्षीण दिखाई पड़ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग के बीच में कहा था कि ईरान के खिलाफ ग्राउंड ऑपरेशन, दूसरे लोग करेंगे. ट्रंप का इशारा, खाड़ी के दूसरे देशों (सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत इत्यादि) की तरफ था. इसके अलावा ट्रंप की कोशिश थी कि इराक के कुर्द लड़ाके भी ईरान के खिलाफ ग्राउंड अटैक में शामिल हो जाएं.

