संबंध सुधारने के खातिर नई दिल्ली आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अपना अहम पार्टनर बताया है. टैरिफ दबाव और पाकिस्तान के साथ सीजफायर का फर्जी क्रेडिट लेने के कारण अमेरिका संग तल्ख हुए रिश्तों को रुबियो ने सुधारने की कोशिश की है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान रुबियो ने भारत को अमेरिका का रणनीतिक साझेदार बताया है.
भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक में आतंकवाद, ऊर्जा संकट, ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष, इंडो-पैसिफिक और ट्रेड डील जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
शनिवार को मार्को रुबियो अपनी पहली भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं. रुबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की तो रविवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर रक्षा सहयोग, मेक इन इंडिया, आर्थिक समझौतों और वैश्विक संकटों पर रणनीतिक चर्चा की है.
भारत-अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे: एस जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर और मार्को रुबियो ने अपनी द्विपक्षीय बैठक के बाद ज्वाइंट प्रेसकॉन्फ्रेंस की. इस दौरान जयशंकर ने कहा कि “भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं.
जयशंकर ने बताया, कि “भारत सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है. इसलिए ऊर्जा की उपलब्धता और सस्ती कीमत भारत के लिए बहुत जरूरी है. इसी वजह से अमेरिका के साथ ऊर्जा संकट और तेल सप्लाई को लेकर विस्तार से बातचीत की गई. बैठक में सिविल न्यूक्लियर सहयोग पर भी चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का स्वागत किया.”
जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ रही है. अमेरिकी टीम जल्द भारत आएगी ताकि ट्रेड डील के अंतिम मसौदे पर काम पूरा किया जा सके. जयशंकर ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करेगा.
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के सामने आतंकवाद जैसी साझा चुनौती है. दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं.
अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है भारत: मार्को रुबियो
रुबियो ने भारत को अहम रणनीतिक पार्टनर बताते हुए कहा, “रणनीतिक साझेदारी तब होती है जब आपके हित एक जैसे हों और आप उन समस्याओं को हल करने के लिए रणनीतिक रूप से मिलकर काम करें. भारत विश्व में हमारे सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है. हमारे हित एक जैसे हैं. हमारे कई तरह के गठबंधन और साझेदारियां हैं, लेकिन रणनीतिक साझेदारी कुछ अलग होती है. इसकी शुरुआत हमारे साझा मूल्यों से होती है. हम विश्व के दो बड़े लोकतंत्र हैं. लोकतंत्र सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं. हमारे पास मीडिया है. आपके पास भी बहुत सारा मीडिया है, बहुत अधिक जांच-पड़ताल होती है. हम अपने मतदाताओं के प्रति जवाबदेह हैं. आपके पास विपक्ष है और आपके पास मीडिया है. इससे हमारे हित एक जैसे होने लगते हैं.”
“भारत और अमेरिका लगभग सभी बड़े वैश्विक मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं. दोनों देश ड्रग तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ भी साथ मिलकर काम करेंगे.”
होर्मुज, आतंकवाद पर क्या है रूबियो की राय
रूबियो ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. रुबियो ने कहा कि दुनिया के अहम जलमार्गों को कोई बंधक नहीं बना सकता. होर्मुज स्ट्रेट का मामला भी भारत और अमेरिका दोनों के हितों से जुड़ा हुआ है.
रुबियो ने कहा कि वैश्विक आतंकी नेटवर्क की वजह से दोनों देशों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का सामना करना पड़ा है. इंटरनेशनल व्यापार का बिना रुके जारी रहना जरूरी है. किसी भी देश द्वारा किसी भी इंटरनेशनल जलमार्ग का राष्ट्रीयकरण नहीं किया जाना चाहिए, इसे सामान्य स्थिति के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.
रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पर जोर: जयशंकर
एस जयशंकर ने बताया कि दोनों के बीच पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की स्थिति पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत हुई.
रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नया जीवन दिया. और व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर साइन किए हैं. रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण के महत्व और हाल के संघर्षों से मिले सबकों को आगे बढ़ाने के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई.
कल हुई हमारी मुलाकात में हमने पश्चिम एशिया के मुद्दों पर चर्चा की। मैंने उन्हें कैरेबिया की अपनी हालिया यात्रा के अनुभव भी बताए।”
जयशंकर ने कहा, ” हम खाड़ी क्षेत्र (गल्फ देशों) में हो रही नई घटनाओं पर ध्यान देंगे. इसके अलावा यूक्रेन, और इंडो-पैसिफिक पर भी चर्चा की.क्वाड बैठक के लिए ये विषय एजेंडे में हैं.”

