छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त बस्तर से अनोखी तस्वीर आई है, जो लोगों का दिल जीत रही है. कभी हाथ में घातक हथियार और बंदूक लिए जो नक्सली महिलाएं घनें जंगलों में हमले करती थीं, वही महिलाएं हाथ में हैंडलूम का दुपट्टा हाथ में लेकर रैंप पर उतरीं.
जिन महिला नक्सलियों के कंधों पर कुछ महीने पहले तक बंदूकें हुआ करती थीं, उन महिलाओं ने दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ रैंप-वॉक करके लोगों को हैरान कर दिया है. (https://www.instagram.com/reel/DcALKlHyXD0/?igsh=NDlzNjYzMzNjbGR1)
रायपुर में पूर्व नक्सली महिलाओं ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो उन महिलाओं और पुरुषों का ह्रदय परिवर्तित कर सकती है, जो अभी भी नक्सलवाद जैसे अपराध की दुनिया में हैं.
आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक्शन के बाद नक्सलियों को हथियार छोड़ने और सरेंडर करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वो मुख्यधारा में लौटकर सुरक्षित समाज में रह सकें.
बंदूकें छोड़ रैंप पर उतरीं पूर्व महिला नक्सली
नक्सली संगठन से जुड़ी रहीं पूर्व महिला नक्सलियों ने रायपुर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के कार्यक्रम में रैंप वॉक कर नई पहचान बनाई है. पारंपरिक परिधानों और हथकरघा से बने कपड़ों में रैंप पर उतरीं महिलाओं का दर्शकों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया. ये महिलाएं मुख्यधारा में शामिल होकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.
राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन में ये पूर्व नक्सली महिलाएं रैंप पर उतरीं. इस वॉक में बस्तर संभाग के सुकमा जिले की नौ आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने पारंपरिक हथकरघा वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया. महिलाएं राज्य के पारंपरिक कोसा सिल्क और हैंडलूम परिधानों में आत्मविश्वास से मुस्कुराती नजर आईं.
कार्यक्रम के दौरान एक पूर्व महिला नक्सली ने कहा, कि उन्होंने सोचा था कि जिंदगी जंगलों में भागते-छिपते कटेगी, लेकिन नक्सलवाद से किनारा करने के बाद उनकी जिंदगी सुधर गई है. महिला नक्सली ने सरकार को थैंक्यू बोलते हुए कहा, कि उन्हें बहुत खुशी है कि रैंप वॉक करने का मौका मिला.
छत्तीसगढ़ के सीएम ने बढ़ाया हौसला, महिलाओं ने क्या कहा
नक्सली महिलाओं ने बताया कि वो पहली बार राजधानी रायपुर पहुंचीं हैं.
सुकमा के चिंतागुफा इलाके के एल्मागुंडा गांव की 22 वर्षीय पुनम ज्योति ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी में ऐसा कुछ होगा.”
पूनम ने पिछले साल दिसंबर में हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया था. ज्योति ने कहा कि “माओवादी आंदोलन छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आया है.”
दूसरी पूर्व नक्सली महिला ने कहा, “जब हम जंगल में थे, तब हमने ऐसी चीजें कभी नहीं देखी थीं. महिला ने बताया कि माओवादियों के सांस्कृतिक विभाग से जुड़ी होने के कारण उन्हें दर्शकों के सामने कार्यक्रम प्रस्तुत करने का थोड़ा अनुभव था, जिससे रैंप वॉक में मदद मिली. हमें खुशी है कि हिंसा छोड़ने के बाद हम शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जिंदगी जी रहे हैं.”
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इन महिलाओं के अदम्य साहस और मुख्यधारा में लौटने के फैसले की दिल से सराहना की है. सीएम साय ने संवाद करते हुए मनोबल बढ़ाया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
मुंबई के एक्सपर्ट से मिली ट्रेनिंग
मुंबई से आए पेशेवर विशेषज्ञों ने लगातार सात दिनों तक इन महिलाओं को रैंप वॉक, वेशभूषा, ग्रूमिंग और माइक पर बेझिझक अपनी बात रखने का विशेष प्रशिक्षण दिया था.
कार्यक्रम इसलिए भी विशेष था कि ये महिलाएं एक जीवंत उदाहरण हैं, कि इन्हें देखकर युवाओं को मुख्यधारा में लाया जा सकता है, ताकि उनका जीवन गरिमापूर्ण बन सके.
दरअसल अमित शाह ने ये प्रण लिया था कि मार्च 2026 तक वो देश को नक्सलमुक्त बना कर रहेंगे. छत्तीसगढ़, झारखंड के अधिकतर जिले नक्सलमुक्त बनाए जा चुके हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर को नक्सल प्रभाव से मुक्त बनाने की दिशा में सुरक्षा बलों खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. जहां बड़े नक्सल लीडर्स मारे जा चुके हैं,या फिर सरेंडर कर चुके हैं.
बस्तर जिले को लाल आतंक के गढ़ के रूप में जाना जाता था लेकिन दावा है कि जिले से नक्सलियों का नामोनिशान मिट चुका है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बस्तर जिला को एलडब्ल्यूई यानी नक्सल प्रभावित क्षेत्र की लिस्ट से बाहर कर दिया गया है.

