वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के स्टील्थ फाइटर जेट जे-20 की तैनाती के बीच, भारतीय वायुसेना ने अपने सुखोई को सुपर-सुखोई बनाने की कवायद शुरू कर दी है. आखिर कैसा होगा ये सुपर-सुखोई. क्या सुपर-सुखोई के आने से मान लिया जाए कि भारत नहीं खरीदेगा रूस का पांचवां श्रेणी का लड़ाकू विमान सु-57.
वर्ष 2018 में भारतीय वायुसेना के सुखोई फाइटर जेट ने जे-20 को अरुणाचल प्रदेश की एयर स्पेस में डिटेक्ट कर लिया था. ऐसे में छह साल तक चीन ने जे-20 को दुनिया से छिपाकर रखा और अब नए एवियोनिक्स और सिस्टम के साथ फिर मैदान में उतरा है. ऐसे में भारतीय वायुसेना ने भी अपने सुखोई लड़ाकू विमानों की फ्लीट को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है, यानी सुखोई-अपग्रेड. सुखोई फाइटर जेट का अपग्रेड, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की नासिक फैसिलिटी में होगा.
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, इसके अलावा अपग्रेड के लिए इन सुखोई फाइटर जेट्स को रूस भी भेजा जाएगा. क्योंकि सुखोई फाइटर जेट एक रूसी लड़ाकू विमान है. भारतीय वायुसेना ने ये साफ नहीं किया है कि आखिर कैसे रूस में इन फाइटर जेट को अपग्रेड किया जाएगा, लेकिन बहुत हद तक संभावना है कि सु-30 एमकेआई में नया इंजन फिट किया जा सकता है. क्योंकि 2024 में भारतीय वायुसेना ने सुखोई के फाइटर जेट्स के लिए 240 नए एएल-31एफपी इंजन का करार किया था और वे अब मिलने भी शुरु हो गये हैं. इसके अलावा एवियोनिक्स भी अपग्रेड किए जाएंगे, ताकि दुश्मन की रडार में ना आ पाए.
ऑपरेशन सिंदूर में सुखोई दिखा चुके दमखम
ऐसे में सुखोई को पूरी तरह स्टील्थ तो नहीं बनाया जा सकता, लेकिन दमदार बनाया जा सकता है. सुखोई फाइटर जेट्स अपना दमखम पिछले वर्ष ऑपरेशन सिदूर के दौरान दिखा चुके हैं. पाकिस्तानी वायुसेना के जिन 11 एयरबेस को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तबाह किया गया था, उनके लिए इस्तेमाल की गई ब्रह्मोस मिसाइल को इन्ही सुखोई फाइटर जेट्स से लॉन्च किया गया था. इसके अलावा, दुश्मन के फाइटर जेट्स से डॉग फाइट के लिए भी सुखोई को स्वदेशी अस्त्रा मिसाइल से लैस कर दिया गया है. ऐसे में सुखोई पूरी तरह से ‘एयर-सुप्रीररेयटी’ के लिए तैयार है.
पिछले ढाई दशक से वायुसेना की रीढ़ की हड्डी
भारतीय वायुसेना पिछले 26 सालों से सुखोई लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रही है. 90 के दशक के आखिरी वर्षों में भारत ने रूस से कुल 272 सुखोई का सौदा किया था. इनमें से कुछ सीधे रूस से खरीदे गए थे और बाकी का निर्माण एचएएल ने नासिक प्लांट में किया था. 2024 में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ 12 अतिरिक्त सुखोई खरीदने का करार किया था. ये वे 12 सुखोई थे, जो पिछले कुछ सालों से किन्हीं कारणों से क्रैश हो गए थे. इन 12 सु-30एमकेआई का निर्माण भी नासिक में शुरु हो गया है और संभावना है कि 2029 तक इन नए सुखोई लड़ाकू विमानों की डिलीवरी शुरु हो जाएगी. ऐसे में मान सकते हैं कि अगले 40 सालों यानी 2070 तक भारतीय वायुसेना इन सुखोई फाइटर जेट्स को ऑपरेट करेगी. यानी भारत की एयर स्पेस की रखवाली करेंगे.
सु-57 में भारत को क्यों नहीं दिलचस्पी
ऐसे में ये सवाल खड़ा होता है कि अगर सुखोई को सुपर-सुखोई बनाने की कवायद शुरु हो गई है तो, क्या भारत अब रूस के स्टील्थ फाइटर जेट सु-57 खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. भारत की एक तरफ तो फाइटर जेट की स्क्वाड्रन लगातार घटती जा रही हैं, दूसरा चीन और पाकिस्तान, दोनों के पास स्टील्थ फाइटर जेट हैं. चीन के पास दो-दो स्टील्थ फाइटर जेट हैं, एक जे-20 है और दूसरा हाल में तैयार किया जे-30 है. चीन ने पाकिस्तान को भी जल्द 40 जे-30 फाइटर जेट देने का करार किया है.
जहां तक सु-57 की बात है, हाल में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साफ कर दिया कि अब भारत, सुखोई के किसी दूसरे वर्जन की संभावनाएं नहीं तलाश रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि, पहला तो ये कि मौजूदा सुखोई को अपग्रेड कर सुपर-सुखोई बनाया जा रहा है. दूसरा, भारत सहित दुनिया के मिलिट्री एक्सपर्ट्स को सु-57 की स्टील्थ क्षमताओं को परखने का खास मौका नहीं मिला है.
यूक्रेन जंग में सु-57 का बेहद कम इस्तेमाल
यूक्रेन जंग में रूस ने बचते-बचाते सु-57 का बेहद लिमिटेड इस्तेमाल किया है. हाल में सु-57 के क्रैश की खबरें भी सामने आई थी. अफ्रीकी देश अल्जीरिया को छोड़ दे तो रूस के इस स्टील्थ फाइटर में किसी दूसरे देश ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है. रूस के यूक्रेन जंग में उलझे रहना भी एक कारण माना जा सकता है.
हालांकि, खुद रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने सु-57 को मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनाने की पेशकश की थी. लेकिन भारत, अपने स्वदेशी स्टील्थ प्रोजेक्ट एमका (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) पर काम शुरु कर चुका है.
घटती स्क्वाड्रन की पूर्ति करेंगे 114 रफाल और एलसीए तेजस का मार्क-1ए वर्जन
जहां तक घटती स्क्वाड्रन का सवाल है, तो एलसीए तेजस का उन्नत वर्जन एलसीए-मार्क-1ए पर काम तेजी से चल रहा है. इसके अलावा, भारत जल्द फ्रांस के साथ एमआरएफए (मीडियम रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट पर करार करने जा रहा है. इसके तहत, 114 रफाल फाइटर जेट भारतीय वायुसेना को मिलेंगे. इनमें से 18 सीधे फ्रांस से खरीदे जाएंगे और बाकी 96 भारत में मेक इन इंडिया के तहत तैयार किए जाएंगे.

