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रूस से तनातनी, जापान का भारत की तरफ रुख

रूस के साथ शुरु हुई ताजा तनातनी और अगले महीने दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट के बीच जापान के रक्षा मंत्री  शिंजीरो कोइजुमी  का जल्द भारत दौरा होने जा रहा है. खुद शिनजोरी ने इस बात की घोषणा की है और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तस्दीक की है.

शिंजीरो  ने भारत के 80 वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर राजनाथ सिंह को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि “मैं जल्द भारत आ रहा हूं.” इस पर राजनाथ सिंह ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि “भारत और जापान के बीच डिफेंस पार्टनरशिप को गहरी करने के लिए मैं आपका स्वागत करता हूं.”

मोदी और जापानी पीएम में भाई-बहन का संबंध

हाल में जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भी दिल्ली का दौरा किया था. उस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताकाइची को बहन के तौर पर संबोधित किया था. पीएम मोदी के जापान के पूर्व प्रधानमंत्री (दिवंगत) शिंजो आबे से गहरी मित्रता थी. ताकाइची उन्हीं शिंजो आबे की पार्टी से ताल्लुक रखती हैं. हाल के वर्षों में भारत और जापान के रक्षा संबंध काफी मजबूत हुए हैं. भारत और जापान की थल सेनाओं, सालाना साझा युद्धाभ्यास धर्म-गार्जियन करती हैं. इसके अलावा, दोनों देशों की नौसेनाएं, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मल्टीनेशनल मालाबार एक्सरसाइज करती हैं.

जापान की शील्ड से तनी रूस, चीन और उत्तर कोरिया की भौहें

जापान के रक्षा मंत्री  शिंजीरो को भारत दौरा हालांकि, इस मायने में अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले 15-20 दिनों में टोक्यो के संबंध रूस से काफी खराब हो गए हैं. इसके पीछे जापान का वो व्हाइट पेपर हैं जिसमें प्रशांत महासागर में यूक्रेन युद्ध जैसे हालात को लेकर आशंका जताई गई थी. रूस-यूक्रेन युद्ध के खतरे को देखते हुए जापान ने अपने डिफेंस बजट को बढ़ाने की बात इस व्हाइट पेपर में की थी. जापान का इस वर्ष का रक्षा बजट करीब 66.5 बिलियन डॉलर था, जो पिछले साल (2025) के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत ज्यादा था.ये रक्षा बजट, जापान की जीडीपी का करीब 02 प्रतिशत था. ऐसे में रूस ने जापान के बढ़ते डिफेंस बजट को लेकर चिंता जताई थी.

जापान ने अगले वर्ष यानी 2027 तक अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए एक खास शील्ड (एसएचआईईएलडी) का भी ऐलान किया है यानी सिन्क्रॉनाइजेड, हाइब्रिड, इंटीग्रेटेड इन्हैंसड लिटोरल डिफेंस. इसमें युद्धपोतों का एक मजबूत जंगी बेड़े के साथ समुद्री ड्रोन्स का एक बड़ा बेड़ा शामिल है.

पुतिन के कुरील आईलैंड दौरे से जापान नाराज

इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जापान के करीब विवादित कुरील आईलैंड का दौरा किय. इसको लेकर जापान की भौंहे तन गई और टोक्यो स्थित रूसी राजदूत को तलब कर फटकार लगा दी.

क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले तक ये आईलैंड जापान के कब्जे में थे. द्वितीय विश्वयुद्ध में मिली हार के बाद, जापान को ये कुरील आईलैंड रूस को देने पड़े थे. जापान अभी भी इन आईलैंड को अपना बताता है. ऐसे में रूस और जापान के बीच तनातनी बढ़ गई है.

अगले महीने पुतिन और शी जिनपिंग का दिल्ली दौरा

भारत की रूस के साथ ऐतिहासिक दोस्ती रही है. ऐसे में शिंजीरो का दिल्ली दौरा अहम है. अगले महीने ब्रिक्स समिट (12-13 सितंबर) में हिस्सा लेने के लिए पुतिन का दिल्ली दौरा लगभग पक्का है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेना तय है.

जापान के खिलाफ चीन, रूस और किम जोंग की घेराबंदी

जापान को रूस और चीन के प्रशांत महासागर में साझा समुद्री-युद्धाभ्यास भी कभी नहीं भाए हैं. क्योंकि जापान का चीन से भी सेनकाकू आईलैंड को लेकर लंबा विवाद रहा है. इसके अलावा जापान को इस बात की आशंका है कि चीन और रूस, उत्तर कोरिया के साथ मिलकर जापान की घेराबंदी करने की जुगत में है. 50 के दशक से यानी कोरिया प्रायद्वीप के विभाजन होने के बाद से ही उत्तर कोरिया और जापान की अदावत रही है. 

विभाजन से पहले पूरा कोरिया, जापान के अधीन था. उस दौरान साम्राज्यवादी और उप-निवेश नीतियों के चलते जापान ने कोरिया पर जबरदस्त जुल्म ढाहे थे. जापानी सेना में कोरियाई महिलाओं को दासी (‘कम्फर्ट-वूमेन’)  बनाकर रखने को लेकर भी कोरियाई देशों ने आज तक जापान को पूरी तरह माफ नहीं किया है. यही वजह है कि परीक्षण के दौरान उत्तर कोरिया की मिसाइल दक्षिण कोरिया के साथ साथ जापान के समंदर में जाकर भी गिरती हैं.

दक्षिण कोरिया की तरह जापान भी अमेरिका के साथ गठबंधन में है. ये भी उत्तर कोरिया के साथ तनातनी का एक बड़ा कारण हैं. यही वजह है कि किम जोंग उन जापान से संबंध सुधारने में विश्वास नहीं रखता है. उत्तर कोरिया के भी रूस के साथ मजबूत संबंध रहे हैं. किम जोंग उन को पुतिन की गिफ्ट दी हुई लिमोजिन कार में सवारी करते हुए देखा जा सकता है. यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस को मिसाइल और ड्रोन भी सप्लाई किए हैं. करीब 10 हजार उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क को यूक्रेन के कब्जे से छुड़ाने में अहम भूमिका निभाई थी.

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