यूक्रेन जंग के लिए रूस ने सीधे तौर से जर्मनी को जिम्मेदार ठहराया है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में साफ तौर से कहा कि जर्मनी ने द्वितीय विश्वयुद्ध से कोई सीख नहीं ली है. बाद में जर्मनी के विदेश मंत्री ने लावरोव से एक बंद कमरे में वार्ता की और युद्ध को ना बढ़ाने का आह्वान किया.
यूएन के अपने संबोधन में रूसी विदेश मंत्री ने जर्मनी को कीव (यूक्रेन) का मेन स्पॉन्सर करार दिया. लावरोव के मुताबिक, रूस के खिलाफ जंग लड़ने के लिए यूक्रेन का मुख्य प्रायोजित-कर्ता कोई और नहीं बल्कि जर्मनी है. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के हवाले से लावरोव ने कहा कि जर्मनी, यूरोप की एक लीडिंग मिलिट्री पावर बनने की जुगत लगा रहा है.
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से जर्मनी उन टॉप पश्चिमी देशों में शुमार रहा है जो कीव को वित्तीय मदद से लेकर हथियार और गोला-बारूद देने में सबसे आगे रहा है. वर्ष 2022 यानी रूस-यूक्रेन जंग शुरु होने के बाद से जर्मनी ने कीव को करीब 60 बिलियन यूरो (करीब 65 हजार करोड़) की सैन्य मदद मुहैया कराई है.
जर्मनी ने यूक्रेन को लड़ने के लिए क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल के साथ, ग्लाइड बम, ड्रोन और अब्राहम टैंक तक सप्लाई किए हैं. जर्मनी ने अब तक यूक्रेन को 40 बिलियन यूरो (43 हजार करोड़) से ज्यादा की सिविलियन फंडिंग की है. इसके अलावा, यूक्रेन से पलायन करने वाले नागरिकों को भी जर्मनी ने अपने देश में शरण दी है.
जर्मनी सहित पश्चिमी देशों की यूक्रेन को मदद से खफा है रूस
रूस को इस बात से बेहद खफा है कि यूक्रेन को जंग लड़ने के जर्मनी और इंग्लैंड जैसे देश फंडिंग से लेकर हथियार तक मुहैया करा रहे हैं. रूस भलीभांति जान गया है कि अगर पश्चिमी (नाटो) देशों ने यूक्रेन की मदद ना की होती तो जंग का रुख बदल गया होता और इतना लंबा भी नहीं खींचता. क्योंकि साढ़े चार साल बाद भी रूस अपना सामरिक उद्देश्य पूरा नहीं कर पाया है.
उल्टा, यूक्रेन भी युद्ध में रूस को बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है. हाल में यूक्रेन के रूस की तेल रिफाइनरियों और ऑयल स्टोर्स पर हुए ड्रोन अटैक उसकी बानगी है. (जेलेंस्की Unstoppable, मॉस्को की तेल रिफाइनरी पर फिर ड्रोन अटैक)
रविवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए लावरोव ने हालांकि कहा कि रूस अपने स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन्स (एसएमओ) के उद्देश्य पूरा करके रहेगा. रूस में यूक्रेन के खिलाफ जंग को एसएमओ के नाम से जाना जाता है.
अपने संबोधन में रूस ने जर्मनी पर निशाना साधा और कहा कि भले जर्मनी मिलिट्री पावर बनने की चाहत रखता है, लेकिन जर्मनी को द्वितीय विश्वयुद्ध की सीख याद रखनी होगी. द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी की करारी हार में रूस की अहम भूमिका रही थी. रूस में अगर जर्मनी के तानाशाह हिटलर की हार नहीं होती तो जर्मनी को दुनिया पर फतह करने से रोकना मुश्किल था.
यूरोप से युद्ध का कोई इरादा नहीं: लावरोव
संबोधन के बाद न्यूयॉर्क में मीडिया से बात करते हुए रूसी विदेश मंत्री ने कहा हमारा यूरोप से युद्ध करने का कोई इरादा नहीं है. अगर कोई ऐसा सोचता है तो कोरी बकवास है. लावरोव ने उल्टा यूरोप पर रूस से जंग लड़ने का आरोप लगा डाला. रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोपीय देश, 2030 तक युद्ध के लिए तैयार होने का दम भर रहे हैं और जमकर हथियारों में पैसा निवेश कर रहे हैं. लावरोव ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयान को दोहराते हुए कहा कि अगर यूरोपीय देशों ने हमला किया तो इस बार जंग बेहद छोटी होगी.
यूक्रेन जंग के बाद पहली बार जर्मनी के विदेश मंत्री से लावरोव की मुलाकात
बाद में जर्मनी के विदेश मंत्री जॉन वाडेफुल ने अपने प्रतिनिधियों के साथ लावरोव से बंद कमरे में अपने वार्ता की. इस दौरान मीडिया को बाहर रखा गया और बैठक के ओपनिंग बयान को भी सार्वजनिक करने से मना कर दिया गया. यूक्रेन जंग शुरु होने के बाद पहली बार रूस और जर्मनी के विदेश मंत्रियों की ये बैठक हुई है. क्योंकि जर्मनी सहित अधिकतर यूरोपीय देशों ने रुस से संबंधों को पूरी तरह तोड़ दिया है.


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